शख्सियत
जो धर्म भाई को बेगाना बनाता है, ऐसे धर्म को धिक्कार!
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April 9, 2021

आखिर राहुल सांकृत्यायन में ऐसा क्या है जो उन्हें बार बार पढ़ने और याद करने की ज़रूरत महसूस होती है? आखिर मौजूदा दौर में राहुल सांकृत्यायन क्यों ज़रूरी हैं? क्यों उनकी किताब 'वोल्गा से गंगा' का ज़िक्र हमेशा आता है और क्यों एक ब्राह्मण होने के बाद भी उन्होंने ब्राह्मणवाद और ढकोसलों का खुलकर विरोध किया? उनके तार्किक विश्लेषणों और समाज को देखने के उनके नज़रिये ने कैसे एक नए समाज की परि

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साहिबजान :  दर्द की अंतहीन दास्तान…
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March 31, 2021

वो पाकीज़ा की साहिबजान थीं... वो साहिब बीवी और गुलाम की छोटी बहू थीं...वो बैजू की गौरी थीं.. दो बीघा ज़मीन की ठकुराइन थीं...परिणीता की ललिता थीं...और सबसे बड़ी उनकी पहचान थी ट्रेजेडी क्वीन की... लेकिन असल में वो महज़बीं बानो थीं...एक बेहतरीन शायरा...एक तड़पती हुई बेचैन अदाकारा...बहुत कुछ थीं मीना कुमारी। 31 मार्च को महज 38 साल की ज़िंदगी जीकर मीना ने दुनिया को अलविदा कह दिया...उनकी ज़िंदगी में कमाल

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दुनिया की सरहद के पार… सागर सरहदी का संसार
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March 22, 2021

सागर सरहदी का जाना एक ऐसे तरक्कीपसंद शख्स का जाना है जिसकी झोली में सिलसिला, कभी कभी और चांदनी भी है तो बाज़ार और चौसर भी...  सागर सरहदी में यश चोपड़ा की ज़रूरतों के मुताबिक ढलने की कला भी है तो वक्त के साथ देश और समाज को बारीकी से देखने का अपना नज़रिया भी... सरहदी साहब बीमार चल रहे थे... 88 साल के हो चुके थे... लेकिन अब भी बेहद संज़ीदे तरीके से वक्त को देखते समझते थे। '7 रंग' के लिए सागर सरहदी को या

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‘इन दिनों कोई किसी को अपना दुख नहीं बताता’
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December 10, 2020

मंगलेश डबराल ने कभी हार नहीं मानी। रचनाकर्म और अपनी जीवनशैली में पूरी ईमानदारी के साथ आखिरी वक्त तक डटे रहे। उनकी कविताएं उनके जीवन के इर्द गिर्द रही हैं जहां पहाड़ भी है और समतल ज़मीन भी, गांव का मुश्किल जीवन भी है और शहरों- महानगरों की आपाधापी भी। रिश्तों की बारीकियां भी हैं, बदलती हुई सामाजिक व्यवस्थाओं और सत्ता के अधिनायकवाद के चेहरे भी हैं। एक अकेलापन और कहीं कुछ छूट जाने का एह

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और अब कपिला जी भी साथ छोड़ गईं…
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September 16, 2020

कपिला जी को कला के क्षेत्र में अद्भुत योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। राज्यसभा की वो पूर्व मनोनीत सदस्य रहीं। कपिला जी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की संस्थापक सचिव थीं और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की आजीवन ट्रस्टी भी थीं। उन्होंने भारतीय नाट्यशास्त्र और भारतीय पारंपरिक कला पर गंभीर और विद्वतापूर्ण पुस्तकें भी लिखी थीं। वह देश में भारतीय कला शास्त्र की आधिक

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पाश : हमारे वक्त का ‘सबसे खतरनाक कवि’
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September 9, 2020

सितंबर साल का नौंवा महीना है। भारत के लिए यह बदलाव और क्रांति की उम्मीदों का महीना है। मौसम यहीं से करवट लेता है। 28 सितंबर को भगत सिंह का जन्मदिन आता है। सन 1950 में इसी महीने की 9 तारीख को जालंधर के तलवंडी सलेम गांव में अवतार सिंह संधू का जन्म हुआ, जिस पर पंजाबी कविता पाश के नाम से गर्व करती है।

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हबीब साहब का सपना पूरा करना अभी बाकी है…
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September 1, 2020

जाने माने रंगकर्मी  और  अपने दौर के जबरदस्त नाटककार  हबीब तनवीर पर बहुत कुछ लिखा जाता रहा है... उनके नाटकों पर, उनके व्यक्तित्व पर और कभी समझौता न करने वाले उनके मिजाज़ पर। उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि पर उन्हें रंगकर्मी अपने अपने तरीके से याद करते हैं... कोई उनके तमाम नाटकों की बात करता है, कोई उनके सामाजिक सरोकार को याद करता है तो कोई नाटकों के प्रति उनके समर्पण के बारे में बताता है। इप्

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कितना भी लिखो, कुछ न कुछ बाक़ी रह जाता है…
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August 18, 2020

वैसे तो सब इन्हें इनके मशहूर नाम 'गुलज़ार साहब' के नाम से जानते हैं पर इनका असली नाम है 'संपूरन सिंह कालरा'। हिंदी फिल्म जगत के महान गीतकार गुलज़ार साहब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इन्होंने हिंदी फिल्मों में सैकड़ों गीत लिखे हैं। इसके अलावा वे एक कवि, पटकथा लेखक, फिल्म निर्देशक और मशहूर शायर हैं। इनकी रचनाएं खासतौर पर हिंदी, उर्दू और पंजाबी में हैं, लेकिन बृज भाषा, खड़ी बोली, मारवाड

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और अब सुर संसार को सूना कर गए पं. जसराज
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August 17, 2020

सुर मानो ठहर गए हों... संगीत खामोश हो गया हो... उनकी गायिकी अब महज़ यादों और अथाह संगीत अल्बमों में रह गई है.. अब हम उन्हें कभी लाइव नहीं सुन पाएंगे... पंडित जसराज चले गए... मेवाती घराने की आवाज़ थम गई...90 साल के पंडित जसराज ने अमेरिकी के न्यू जर्सी में सबको हमेशा के लिए अलविदा कह गए... कोराना काल में वैसे भी लगातार ऐसी दुखद और मनहूस खबरें आ रही हैं... पंडित जी भी इसी कतार में शामिल हो गए... बहुत दूर चल

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भारतीय रंगकर्म को अनुशासनबद्ध किया अल्काज़ी ने
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August 6, 2020

भारतीय रंगमंच के पुरोधा कहे जाने वाले इब्राहिम अल्काज़ी ने रंगमंच की दुनिया को क्या क्या दिया, उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक के तौर पर क्या क्या किया, एनएसडी जैसे बड़े फलक को संभालते हुए कैसे वो आधुनिक भारतीय रंगमंच के सम्राट बन गए और क्यों उन्हें रंगमंच के 'तुग़लक' जैसी उपाधियां मिलीं... ऐसे तमाम आयामों पर जाने माने रंगकर्मी-पत्रकार और आगरा में एक बेहद ज़मीन से जुड़ी सां

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