मौजूदा खतरे से निपटने का एकमात्र तरीका जनांदोलन – मदन कश्यप

फासीवादी सत्ता संस्कृति के खिलाफ संघर्ष के संकल्प के साथ जसम बिहार का सम्मेलन सम्पन्न। जितेन्द्र कुमार अध्यक्ष तथा दीपक सिन्हा सचिव चुने गए।

कवि कौशल किशोर ने कहा – बुलडोजर फासीवाद का प्रतीक

समस्तीपुर । जन संस्कृति मंच (जसम) का दो दिवसीय सातवां बिहार राज्य सम्मेलन 26 व 27 सितंबर को समस्तीपुर कालेज के सभागार में नयी राज्य कमेटी के चुनाव के साथ सम्पन्न हुआ।  ‘फासीवादी सत्ता संस्कृति के खिलाफ शहीद भगत सिंह और डॉक्टर अंबेडकर के सपनों का भारत ‘ — इस थीम पर हुए सम्मेलन की शुरुआत शहीद-ए- आजम भगतसिंह और डा अम्बेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण तथा ‘कारवां चलता रहेगा’ शहीद गीत के साथ हुई। सांस्कृतिक मार्च भी निकाला गया जो नारे लगाते हुए महाविद्यालय में स्थित संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तक गया। सम्मेलन स्थल का नाम रामचंद्र राय – आर.सी. नगर, मंच का नाम जनकवि सुरेंद्र प्रसाद मंच और सभागार का नाम जनकवि महेश्वर सभागार रखा गया था।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए जाने माने कवि मदन कश्यप ने कहा कि फासीवादी प्रवृत्तियों का हमें जीवन के हर स्तर पर विरोध करना है और सभी तरह की सुप्रीमो संस्कृति के विरुद्ध लोकतांत्रिक व जनवादी केंद्रीयता की परंपरा को कायम रखने के लिए संघर्ष करना होगा। खतरे बड़े हैं। अनेक बार भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इन्हें पहचानने और उससे निपटने का एकमात्र तरीका वैचारिक दृढ़ता और जनता के आंदोलन के साथ हमारी एकता है।

विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में  कवि और जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर (लखनऊ) ने कहा कि यह दौर है जब भगतसिंह और डा अम्बेडकर की राह पर चलने वालों के लिए ”दिमागी नक्सल ‘ जैसे पद हैं। बुलडोजर फासीवाद का प्रतीक बना है। भारतीय फासीवाद को आरएसएस के 100 साल के क्रियाकलाप और साम्राज्यवाद परस्त पूंजीवादी विकास में देखा जाना चाहिए। इससे संघर्ष में भगत सिंह और डॉ अंबेडकर हमारे पथ-प्रदर्शक हैं। डॉ अंबेडकर ने लोकतंत्र को लेकर जो शंकाएं जाहिर की थीं, वह निर्मूल नहीं थी। लोकतंत्र और संविधान निशाने पर हैं। मोदी के 12 साल के दौरान महिलाओं ने संघर्ष किया। किसानों के संघर्ष हुए। छात्र नौजवान आज मोर्चे पर हैं। भगत सिंह का नारा था इंकलाब। आज उस क्रांति की जिम्मेदारी लेने की जरूरत है।

विशिष्ट अतिथि और जाने माने आलोचक, जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सियाराम शर्मा (छत्तीसगढ़) ने इटली, जर्मनी के फासीवाद व नाजीवाद की विशिष्टता पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय फासीवाद टेक्स्टबुक फासीवाद है, जिसका खात्मा जनता की चेतना को प्रगतिशील व वैज्ञानिक बनाए बिना संभव नहीं है। यह पूंजीवाद का ही बर्बर रूप है।

मुख्य अतिथि थे जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह। उन्होंने कहा कि देश में जेनजी आंदोलन ने फासीवादी सत्ता के प्रचार के तरीकों को मात देते हुए लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की आजादी और प्रगतिशील विचारों को पुनर्स्थापित किया है। जेनजी ने फासीवादी सत्ता को डराना शुरू कर दिया है, सड़क के संघर्ष को तेज करना वक्त की मांग है। किसानों ने सरकार को पीछे ढकेला। सात सौ किसानों ने शहादत दी। जंतर-मंतर आंदोलन ने सत्ता के गुरुर को तोड़ा है। इससे जन संस्कृति आंदोलन के लिए अनुकूल वातावरण बना है। हमें योजनाबद्ध पहल लेनी होगी।

जसम के इस सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों और अतिथियों का स्वागत करते हुए जसम समस्तीपुर के जिलाध्यक्ष व स्वगताध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि कलाकारों और लेखकों को फासीवाद के खिलाफ जनसाधारण के संघर्ष में अपना योगदान देना चाहिए। जनतंत्र खतरे में है। इस सत्र को प्रगतिशील लेखक संघ और जनवादी लेखक संघ के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया तथा सम्मेलन को अपनी शुभकामनाएं दीं।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि-कथाकार जितेंद्र कुमार, प्रो. सुरेंद्र प्रसाद सुमन, प्रो. संतोष कुमार और प्रो. अहमद सगीर के अध्यक्षमंडल ने की। संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी-कवि दीपक सिन्हा ने किया। इसी सत्र में दीपक सिन्हा के नए काव्य-संग्रह “ब्लैक स्पॉट” का लोकार्पण हुआ। सम्मेलन स्थल पर जनवादी कलाकारों की आर्ट गैलरी और प्रगतिशील साहित्य का बुक स्टॉल भी लगाया गया था।

इस दिन शाम में कवि गोष्ठी-सह-मुशायरे का आयोजन हुआ, अध्यक्षता राज्य सह-सचिव सुमन कुमार सिंह ने की, संचालन शंभू भारतीय ने किया। 25 से अधिक कवियों-शायरों ने भाग लिया – मदन कश्यप, अनिल अंशुमन, कौशल किशोर, डॉ. प्रभात कुमार की चर्चित कविता “बुलडोजर! बुलडोजर!” और मो. सगीर के मुशायरे को विशेष सराहना मिली। इसके दूसरे हिस्से में नाटक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन था। इसमें बेगूसराय की टीम ‘रंगनायक – द लेफ्ट थियेटर’ के द्वारा नाटक “राजा के दो सींग” (निर्देशन – दीपक सिन्हा), मधुबनी की ‘नवतुरिया’, रोहतास की ‘ललकार’, आरा की ‘युवनीति’ तथा छपरा की ‘अभिव्यक्ति’ टीम की प्रस्तुतियां हुईं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन प्रमोद यादव, विजय सिन्हा और पुनीत पाठक ने किया।

दूसरे दिन यानी 27 सितंबर का सत्र सांगठनिक था। सुबह की शुरुआत क्रांतिकारी गीत-गायन से हुई। इस सत्र में निवर्तमान राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उसमें जसम की विभिन्न इकाइयों के द्वारा पिछले सम्मेलन के बाद से किये कामकाज की रिपोर्ट थी। वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक हालात पर भी एक दृष्टि थी। इस पर सुमन कुमार सिंह, डॉ. प्रभात कुमार, समता राय, कृष्ण कुमार निर्मोही, निर्मल नयन, राजेश कमल, विंदेश्वरी सिंह आदि प्रतिनिधियों ने चर्चा की। इस सत्र की अध्यक्षता जितेंद्र कुमार, तबस्सुम फरहाना, अनिल अंशुमन, प्रो. सुरेंद्र प्रसाद सुमन, रामबाबू आर्य ने की।

इस सत्र में हुए विचार विमर्श का समाहार करते हुए राज्य सचिव दीपक सिन्हा ने कहा कि “खौफ, बुलडोजर की संस्कृति और फासीवाद के दौर में जसम प्रतिरोध की संस्कृति की लड़ाई लड़ता रहेगा। हम जनतांत्रिक मूल्यों और जनसांस्कृतिक मूल्यों की हिफाजत करने वाले कलाकार, कलमकार और साहित्यकार हैं। हमें न सिर्फ पूरे देश में इस संदर्भ को लेकर सर्वेक्षण करना होगा कि हमारी युवा पीढ़ी इस भयावह सत्ता-संस्कृति में किस तरह की संस्कृति की वाहक बन रही है। वो व्हाट्सएप या फेसबुक या सोशल मीडिया पर किस तरह के कार्यक्रम और रील्स बना रहे हैं। वो सत्ता-प्रदत्त यौन हिंसा, उन्माद, लैंगिक भेद में हिंदुत्व के नाम पर इस्तेमाल तो नहीं हो रहे हैं। जसम इसकी पड़ताल करेगा।” इसे सम्मेलन ने “सांस्कृतिक पड़ताल सर्वे” के रूप में केंद्रीय कार्यभार बनाया है। तय हुआ कि कार्यशाला के बाद जिलों में जाकर युवा, महिला, दलित, अल्पसंख्यक तबकों की सांस्कृतिक रुचि की पड़ताल की जाएगी। इसी सत्र में राजनीतिक प्रस्ताव पारित कर ज्ञानेश कुमार को हटाने को लेकर आंदोलन का शंखनाद भी किया गया।

सम्मेलन के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक कौशल किशोर के अनुमोदन पर 125 सदस्यीय बिहार राज्य परिषद और 45 सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी (जिसमें 43 पद भरे गए, 2 रिक्त) का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।
हिन्दी और भोजपुरी के कवि, कथाकार व आलोचक जितेन्द्र कुमार अध्यक्ष तथा रंग निर्देशक, नाटककार और कवि दीपक सिन्हा सचिव चुने गए। संस्कृति के विविध क्षेत्रों से जुड़े 14 उपाध्यक्ष भी चुने गए जिसमें . प्रो. सुरेंद्र प्रसाद सुमन, डॉ. रामबाबू आर्य, निर्मल नयन, डॉ. प्रभात कुमार,कृष्ण कुमार निर्मोही, प्रमोद यादव, शंभू भारतीय, अनिल अंशुमन, अहमद सगीर, विजय सिन्हा, डॉ. स्नेहलता कुमारी, समता राय, डॉ. बिंदेश्वरी सिंह और सुनील कुमार शामिल हैं। इसके साथ ही पुनीत पाठक को उप सचिव तथा सुमन कुमार सिंह, रंजन कुमार (बमबम), रिया कुमारी, डॉ. संजय कुमार और अशोक पासवान को सह-सचिव की जिम्मेदारी दी गई।

समस्तीपुर कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य प्रो. दिनेश्वर यादव के धन्यवाद ज्ञापन और पुनीत पाठक, प्रमोद यादव, अनिल अंशुमन के नेतृत्व में “हम होंगे कामयाब” के सामूहिक गायन के साथ दो दिवसीय 7वां राज्य सम्मेलन समाप्त हुआ।

(जसम, बिहार के राज्य सचिव दीपक सिन्हा की विज्ञप्ति)

Posted Date:

September 29, 2026

4:58 pm Tags: , , ,

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