
हम कोई कहानी अथवा किताब क्यों पढ़ते हैं? पढ़कर यदि हम समझते हैं तो उस पर अमल क्यों नहीं करते हैं? हो सकता है कि इन दिनों मेरा दिमाग खराब हो गया हो. इसलिए शायद मैं बहकी-बहकी बातें सोचने लगा हूं. हर साल की तरह इस साल भी 31 जुलाई को हम प्रेमचंद जयंती मनाएंगे. उनकी कहानियों पर चर्चा करेंगे और शांत बैठ जाएंगे. हम उन कहानियों से कुछ सीखते क्यों नहीं हैं? यदि सीखना नहीं है तो फिर पढ़ना क्यों है
Read More
साठ से अस्सी के दशक को फिल्म संगीत का सुनहरा दौर कहा जाता था और तब के मधुर गाने आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। इस दौर को इतना मधुर और यादगार जिन आवाज़ों ने बनाया उनमें मोहम्मद रफी, मुकेश, किशोर कुमार, मन्ना डे, महेन्द्र कपूर, हेमंत कुमार, तलत महमूद, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, शमशाद बेगम जैसे नाम हैं जिनकी आवाज़ दिल के भीतर तक उतर जाती थी। इन्हीं में से एक आवाज़ है मोहम्मद रफ़ी साहब की।
Read More
जो लोग थोड़ा बहुत पंजाबी साहित्य को करीब से जानते हैं उनके लिए शिव कुमार बटालवी का नाम उतना अनजाना नहीं है.. लेकिन हिन्दी या अन्य भाषाओं के साहित्य जगत के लोगों के लिए बटालवी कुछ दिनों पहले तक बहुत नहीं जाने जाते थे.. कुछ साल पहले एक फिल्म आई उड़ता पंजाब.. और उसमें एक गीत इस्तेमाल किया गया... नए संदर्भों में... दर्द और तड़प से भरा हुआ... इक कुड़ी जि दा नां मोहब्बत.. गुम है..गुम है...गुम है.. ये गी
Read More
बारिश ने पूरे देश में तबाही मचा रखी है। आज देश के ख्यातिलब्ध गीतकार नीरज जी की बरसी है। मुझे "अबके सावन में ये शरारत मेरे साथ हुई..." शेर याद आ रहा है। टीवी पर मिनट मिनट की खबरें ब्रेक हो रही हैं। दिल्ली के अन्ना नगर में नाले में बरसाती पानी के सैलाब से किनारे बसे कई मकान बह गए। मिंटो ब्रिज के नीचे डीटीसी की एक बस पानी में डूब गई। बस की तो औकात ही क्या एक आटो और एक कार भी मिंटो ब्रिज के नीचे भ
Read More
19 जुलाई 2018 को जब गोपाल दास ‘नीरज’ ने करीब 94 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा तो मानो एक युग का अंत हो गया...लेकिन उनकी रचनाएं अमर हैं.. आज भी लोगों की ज़बान पर गूंजती हुई...उनके आखिरी दिनों में उन्हें करीब से देखने, समझने और महसूस करने का मुझे अलीगढ़ के उनके घर में मौका मिला था। एक पूरा दिन उनके साथ गुज़ारना, उनके जीवन के तमाम पहलुओं के बारे में अंतरंग बातें... आज के दौर की कविता से लेकर गीत
Read More
जब भी आप जाने माने कथाकार, व्यंग्यकार और बेहद संवेदनशील लेखक से रा यात्री से मिलेंगे, आपको इस 88 बरस के नौजवान के भीतर अपार रचनात्मक ऊर्जा मिलेगी... सेहत बेशक साथ नहीं देती, ज्यादातर वक्त बिस्तर पर गुज़रता है और कुछ बीमारियों ने उन्हें बरसों से जकड़ रखा है, लेकिन जब यात्री जी अपनी रौ में बातें करते हैं तो दुनिया जहान की तमाम खबरों, साहित्य जगत की हलचलों के अलावा अपने दौर की ढेर सारी यादो
Read More
इस कोरोना समय में समाज के जिन वर्गों को और भी अधिक सीमांत की तरफ धकेला है उसमें कलाकार भी हैं। हर विधा के कलाकार- चाहे वे रंगकर्मी हों, पेंटर हों, मूर्तिशिल्पी हों, गायक हों, वादक हों, नर्तक या नृत्गांगना हों। या लोक कलाकार हों। फिल्मों में काम करनेवाले हों। देश के बड़े बड़े शहरों से जो खबरें (गावो से भी) आ रही हैं वे तो यही बता रही हैं कि युवा और संघर्षशील कलाकारों की जान पर बन आई है।
Read More
एक दिन आकस्मिक किसी का फोन आया कि एक बजे दोपहर को ओबेरॉय होटल में आपको साधना और उनके पति आर.के.नैयर ने लंच पर बुलाया है। मैंने कहा कि फ़िल्म मेरी बीट नहीं है, मुझे क्यों बुलाया गया है। उस व्यक्ति का जवाब था, यह तो मुझे पता नहीं लेकिन मुझे आपका फोन नंबर और नाम दिया गया है। उन दिनों मैं 'दिनमान' में काम करता था। अपने संपादक रघुवीर सहाय के कक्ष में जाकर हक़ीक़ बयां की। उन्होंने कहा हो आईये।
Read More
एक दौर था जब “संपादक के नाम पत्र” का महत्व समाचार पत्रों में अग्रलेखों के ठीक बाद हुआ करता था| चर्चित पत्र अंतिम होता, तो श्रेष्ट पत्र पर पारितोष की परम्परा भी थी| ज़माना बदला| अब विज्ञापनदाता ही भारी भरकम संवाददाताओं को कोहनी मार देते हैं| तो अदना पाठक की क्या विसात? उसका कालम-स्पेस तो सिकुड़ेगा ही| ऐसे मंजर में 4 जुलाई 2020 को मुंबई के मलाड में 90-वर्षीय एंथोनी पाराकल का निधन पीड़ादायक है|
Read More
अकबर के दरबार में रहीम मीर अर्ज थे। वही अब्दुर रहीम खानखाना जो हिंदी साहित्य में अपने नीति दोहों की वजह से बड़ा ही सम्मानजनक स्थान रखते हैं। इन रहीम के सेवक थे फहीम खान। फहीम खान बहुत चर्चित नहीं हैं मगर एक वजह से उनका नाम इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। दिल्ली के निजामुद्दीन वेस्ट में सब्जबुर्ज नाम से एक चार सदी पुरानी इमारत है।
Read More