
एक संवेदनशील शायर और आसपास की दुनिया को बेहद करीब से देखने वाले गुलज़ार साहब के लिए जन्मदिन का मायना भले ही ये हो सकता है लेकिन अपने बेहतरीन लफ्ज़ों की बदौलत उन्होंने साहित्य और संगीत को जो दिया है, वो एक बेमिसाल ख़ज़ाना है। गुलज़ार यानी संपूर्ण सिंह कालरा को एक अलग पहचान बेशक फिल्म इंडस्ट्री से मिली हो लेकिन उनके भीतर का कवि और लेखक छोटी सी उम्र में ही आकार लेने लगा था।
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पॉलपोथन नगर इफको टाउनशिप में स्वतंत्रता दिवस उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह स्थल पर पहुंचे मुख्य अतिथि इफको आंवला के कार्यकारी निदेशक श्री जी के गौतम ने परेड का निरीक्षण किया एवं ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली। परेड में शामिल इफको सुरक्षागार्ड ,केन्द्रीय विद्यालय के बच्चे एवं स्काउट गाइड के मजबूत इरादे और देश भक्ति के प्रति जज्बा देख पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। विशेष वा
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अटल जी बेशक अब हमारे बीच न रहे हों, लेकिन उनकी यादें हर शहर के तमाम लोगों के दिलों में बसी हैं। वो जहां भी जाते, उस जगह के लोगों से एक आत्मीय रिश्ता जोड़ लेते थे। अपने लंबे राजनीतिक और साहित्यिक जीवन में अटल जी का गाजियाबाद से भी ऐसा ही लगाव था।
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गाजियाबाद के सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में स्वतंत्रता दिवस उल्लास पूर्वक मनाया गया। बुलंदशहर रोड स्थिति सीनियर ब्रांच में नन्हें मुन्ने बच्चों सहित सीनियर छात्रों ने देश भक्ति से ओतप्रोत गीतों पर एक से एक बढ़िया प्रस्तुति दी। छात्रों ने प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने का संदेश नाटिका के माध्यम से दिया, वहीं छात्राओं ने नृत्य नाटिका के माध्यम से जल संरक्षण
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इन आखिरी सांसों में अटल जी के पीछे का पूरा अतीत है... जीवन की जंग है... अस्पताल का वेंटिलेटर है.. कृत्रिम सांसें हैं ... लेकिन अब एक एक पल भारी है... 7 रंग ने अटल जी को हमेशा पूरे सम्मान और संवेदना से अपने साथ पाया है.. आज भी हम उनके अतीत को याद करते हैं.. खुशनुमा और जीवंत लेकिन अकेले व्यक्तित्व को महसूस करते हैं... उनकी चंद कविताएं और तस्वीरें फिर से आपके लिए...
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हिंदी के मशहूर लेखक राजकुमार गौतम का मानना है कि किताबों से जब मनुष्य बदलता है तब पूरी दुनिया बदलती है। कुछ सिरफिरे बंदूक के बूते दुनिया बदलने की कोशिश कई बार कर चुके हैं। लेकिन बंदूक से हिंसा ही निकलती है और किताब से प्रेम निकलता है। प्रेम ही मनुष्य को इंसान बनाने के साथ उसे इंसाफ के रास्ते पर ले जाता है।
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बदलते वक्त और विकास की अंधी दौड़ के साथ तमाम शहर बदल गए। हमारे गाज़ियाबाद की शक्ल-ओ-सूरत भी बदल गई। संस्कार से लेकर संस्कृति तक और विरासत से लेकर राजनीति तक.. आज़ादी के बाद से अबतक कैसे कैसे बदला ये शहर, क्या है इसकी कहानी, कैसी थी इसकी रवायत... हमारे शहर के ऐसे तमाम बुजुर्ग इस बदलाव के गवाह हैं, जिन्होंने गाजियाबाद को पल पल महसूस किया और जिया। ‘अमर उजाला’ ऐसे तमाम आदरणीय बुजुर्गों की या
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वर्षा ऋतु का आगमन.. आसमान में काले मेघ.. हाथों में मेहंदी और सावन के कजरी गीत एवं नृत्य से इफको परिवार की महिलाओं ने इफको अतिथि गृह के हाल में मनायी तीज। सुबह महिला क्लब द्वारा आयोजित हरियाली तीज की थीम शिव आराधना रही। कार्यक्रम की मुख्य अथिति सुबह महिला क्लब की अध्यक्षा श्रीमती साधना गौतम ने द्वीप प्रज्जवलित कर तीज का शुभारंभ किया। तीज गणेश वंदना से आरम्भ हुई।
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कांवड़ यात्रा में परंपरा और संस्कृति के तमाम रंग बिखरे होते हैं। बेशक कांवड़ियों के नाम पर हुड़दंगियों की भी एक बड़ी फौज होती है, लेकिन आस्था के नाम पर और इनके अनजाने आतंक की वजह से कोई कुछ बोलता नहीं। कांवड़ियों के कई अप्रिय किस्से भी हैं, अपने देश में अंधी आस्था के नाम पर बड़ी बड़ी सियासत चलती रही है, सत्ता का खेल चलता रहा है, इसके बावजूद कांवड़ यात्रा या कांवड़िये उत्तर भारत की संस
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