किसी भी देश की संस्कृति को विकसित करने, इसे सहेजने और खुद को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन ज़रिया है साहित्य। साहित्य वो विधा है जिसके कई आयाम हैं। कहानियां, कविताएं, गीत, शायरी, लेख, संस्मरण, समीक्षा, आलोचना, नाटक, रिपोर्ताज, व्यंग्य – अभिव्यक्ति के तमाम ऐसे माध्यम हैं जिनसे साहित्य बनता है और समृद्ध होता है। साहित्य में समाज और जीवन के हर पहलू की झलक होती है। संवेदनाओं और दर्शन का बेहतरीन मेल होता है। संस्कृति और तमाम कालखंडों की और राजनीति से लेकर बेहद निजी रिश्तों तक की अद्भुत अभिव्यक्ति होती है। भाषा का एक विशाल संसार गढ़ता है साहित्य। साहित्य के मौजूदा स्वरूप, नए रचनाकर्म और छोटे बड़े साहित्यिक आयोजनों के अलावा आप इस खंड में पाएंगे साहित्य का हर रंग…


साहित्य
‘नोटबंदी से न काला धन रूकेगा, न भ्रष्टाचार खत्म होगा’
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December 9, 2016

कवि और गीतकार गोपालदास नीरज के साथ 7 रंग और indianartforms.com के संपादक अतुल सिन्हा ने कुछ अंतरंग पल गुज़ारे। अलीगढ़ में उनके घर पर कई मुद्दों पर उनसे आत्मीय बातचीत भी की। उम्मीदों के इस कवि ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले पर नाउम्मीदी ज़ाहिर की और चुटकी लेते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और काला धन की समस्या ऐसे फैसलों से खत्म नहीं होने वाली।

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कवि और गीतकार नीरज जी ने किया 7 रंग का लोकार्पण
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December 9, 2016

अपनी वेबसाइट www.indianartforms.com और वेब टीवी 7 रंग की कामयाबी के लिए देश के जाने माने वयोवृद्ध कवि और गीतकार गोपालदास नीरज ने शुभकामनाएं दी हैं। अलीगढ़ के अपने निवास पर नीरज जी ने 7 रंग का लोकार्पण करते हुए इसे करीब से देखा और भरोसा जताया कि आज साहित्य, कला और संस्कृति को लेकर मीडिया में जो उदासीनता और शून्य की स्थिति है 7 रंग और www.indianartforms.com इसे दूर करेगा।

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आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं…
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December 7, 2016

92 साल की उम्र में भी बेहद सक्रिय और उम्मीदों से भरे मशहूर कवि और गीतकार गोपालदास नीरज को सुनना एक अनुभव से गुज़रने जैसा है। देश और समाज को, रिश्तों और रिवाज़ों को, सियासत और सियासतदानों को अपने तरीके से देखने वाले नीरज जी ने बेहिसाब लिखा है और लिख रहे हैं। अलीगढ़ के अपने घर में नीरज जी अपने फ़ुरसत के पल गुज़ारते हैं लेकिन आज भी शायरी, कविता और गीतों की कोई भी खास महफ़िल बगैर नीरज जी के प�

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वजू करूं अजमेर में.. काशी में स्नान
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December 4, 2016

आज के दौर में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर बहस छिड़ी है और देश एक अजीबो गरीब दौर से गुज़र रहा है। रिश्तों और सामाजिक तानेबाने पर सवाल उठ रहे हैं। सियासत के साथ साथ तकनीकी विकास, वर्चुअल दुनिया, कैशलेस इंडिया का सपना और कतारों में खड़ा देश हर गली चौराहों पर नज़र आ रहा है, ऐसे में बेकल उत्साही जैसे शायर का गुज़र जाना किसी अपने को खो देने जैसा है।

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प्रमोद कौंसवाल की कलम से —
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November 30, 2016

बड़ी ही सस्ती, लेकिन जिसे वह सरल कहती हैं, गायिकी करने वाली फ़रीदा ख़ानम की समकालीन पाकिस्तानी फ़नकार मुन्नी बेगम से उनके कार्यक्रम के एक रोज़ पहले यानी पूर्व संध्या पर मैंने उनका एक इंटरव्यू लिया- सिटी ब्यूटीफ़ुल के सेक्टर बाइस में। वह मेंहदी हसन की तरह कभी संजीदा गायिकी नहीं कर सकी हैं

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जश्न-ए-रेख़्ता 17 फरवरी 2017 से दिल्ली में
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November 29, 2016

जश्न-ए-रेख़्ता, ३ दिवसीय वार्षिक महोत्सव जिसके जरिए उर्दू भाषा के जन्म और विकास का जश्न मनाया जाएगा। इस महोत्सव के जरिए ऊर्दू भाषा के जन्म और भारतीय उपमहाद्वीप में उसके विकास की सराहना और इसकी सुंदरता और बहुमुखी प्रतिभा के प्रति जागरुकता पैदा करना है।

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भाषा और शब्दों से खेलने की सियासत
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November 29, 2016

शब्द का अपकर्ष भाषा की हत्या है। विकलांग शब्द का दिव्यांग किया जाना मैं एक शब्द की हत्या मानता हूं। संवेदनशील समाज तो विकलांग शब्द का प्रयोग पहले भी बेहद सम्मान के साथ किया करता था। बस, ट्रेन या किसी भी अन्य स्थान पर विकलांग बंधुओं के लिए संवेदनशील लोग सदैव सहानुभूति रखते हैं। जिन लोगों की सोच बदलने के लिए दिव्यांग शब्द लाया गया है, उनके लिए तो यह शब्द भी व्यंग्य और उपेक्षा का शब्द ब

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नामवर सिंह का जन्मदिन और महाश्वेता देवी की विदाई
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August 29, 2016

एक अजीब संयोग है। जीवन के 90 साल पूरे करने और साहित्य जगत में अहम मुकाम पाने वाली दो शख्सियतें आज की तारीख में खबर बन गईं। सबसे जुझारू और आम जीवन से जुड़ी कहानियां और उपन्यास लिखने वाली महाश्वेता देवी हमें हमेशा के लिए छोड़ गईं। कोलकाता में उन्होंने आखिरी सांस ली और उन तमाम संघर्षशील और नए कल की उम्मीदों से भरे साहित्यप्रेमियों को अलविदा कह दिया।

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और अब नीलाभ भी चले गए…
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July 23, 2016

मशहूर कवि और पत्रकार नीलाभ अश्क का संक्षिप्त बीमारी के बाद शनिवार को निधन हो गया। वह 70 साल के थे। नीलाभ का जन्म 16 अगस्त 1945 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता उपेंद्र नाथ अश्क हिंदी मशहूर लेखक थे। कई चर्चित कृतियों का अनुवाद भी किया। कुछ ही दिन पहले नीलाभ के समकालीन रहे कवि पंकज सिंह ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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सियासत के फेर में उर्दू बेदार
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February 19, 2016

इलाहाबाद : जिस मुल्क में हम रहते है उसमें 5 करोड़ 15 लाख 36 हजार 111 लोग उर्दू के जानकार हैं जो रोजाना जिन्दगी में उर्दू बोलते या लिखते हैं| इस मुल्क के 6 सूबों में उर्दू को सरकारी जुबान का दर्जा भी दे दिया गया है। बावजूद इसके आज मुल्क में इस भाषा का सूरत-ए-हाल उर्दू पसंद लोगों की आँखें खोलने वाला है|

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