किसी भी देश की संस्कृति को विकसित करने, इसे सहेजने और खुद को अभिव्यक्त करने का एक बेहतरीन ज़रिया है साहित्य। साहित्य वो विधा है जिसके कई आयाम हैं। कहानियां, कविताएं, गीत, शायरी, लेख, संस्मरण, समीक्षा, आलोचना, नाटक, रिपोर्ताज, व्यंग्य – अभिव्यक्ति के तमाम ऐसे माध्यम हैं जिनसे साहित्य बनता है और समृद्ध होता है। साहित्य में समाज और जीवन के हर पहलू की झलक होती है। संवेदनाओं और दर्शन का बेहतरीन मेल होता है। संस्कृति और तमाम कालखंडों की और राजनीति से लेकर बेहद निजी रिश्तों तक की अद्भुत अभिव्यक्ति होती है। भाषा का एक विशाल संसार गढ़ता है साहित्य। साहित्य के मौजूदा स्वरूप, नए रचनाकर्म और छोटे बड़े साहित्यिक आयोजनों के अलावा आप इस खंड में पाएंगे साहित्य का हर रंग…

इस बुरे और हताशा से भरे समय में रजा फाउंडेशन ने विश्व कविता समारोह का आयोजन कर अंधेरे में एक रौशनी फैलाने का काम किया।भले ही यह रोशनी थोड़ी हो टिमटिमाती हो पर उसने जीने की उम्मीद और उल्लास को जगाया दुख और पीड़ा का बयान करते हुए प्रेम की खोज की।आलिंगन और चुम्बन में जीवन के रंग को शब्दों में चित्रित किया युद्ध और विध्वंस के मलबे में फूल खिलाने की कोशिश की।
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स्त्री दर्पण नामक ऐतिहासिक पत्रिका की संपादक और जानी मानी समाजिक कार्यकर्ता रामेश्वरी नेहरू को लखनऊ में याद किया गया। इस मौके पर स्त्री लेखा पत्रिका के नए अंक का लोकार्पण प्रो. रूपरेखा वर्मा, वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना, प्रो रमेश दीक्षित, आलोचक वीरेन्द्र यादव और कवि कात्यायनी ने किया। स्त्री विमर्श केवल अस्मिता विमर्श नहीं है बल्कि वह दुनिया को बदलने का एक व्यापक विमर्श है।
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“लिखत पोएटिका – क” (प्रकाशक - पाखी रे क्रियेटिव्स, जयपुर) नाम से आई इस पुस्तक में 95 रचनाकारों की एक-एक रचना शामिल है। इनमें चर्चित नाम भी हैं और नवोदित भी। संग्रह के शुरू में इरशाद कामिल और तस्वीर कामिल के संबोधन (“कविता के नाम” और “आपको इकबाल मुबारक”) भी हैं। “कविता के नाम” और “आपको इकबाल मुबारक” के लिए इतना ही कहा जा सकता है कि अगर आप किसी बेमिसाल उपन्यास या कहानी को पढ़ने के बाद ल
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‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के तीसरे संस्करण का आयोजन इस बार पटना में 25 से 28 सितंबर 2025 के बीच सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में होगा। इस उत्सव का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं साहित्य अकादेमी द्वारा संयुक्त रूप से बिहार सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। यह जानकारी आज इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित प्रेस सम्मेलन में संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक
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नब्बे के दशक के बेहद संवेदनशील कवि मोहन राणा की। कविता का शीर्षक है घर। कई बरसों के बाद मोहन राणा पिछले दिनों भारत आए। रहते वो इंग्लैंड में हैं। वहीं का एक शहर है - बाथ जहां मोहन राणा रहते हैं। अब तो ब्रिटेन के नागरिक भी हो गए हैं। दिल्ली में जन्में, पले बढ़े और पढ़े। जब दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते थे तो कला, साहित्य और खासकर कविता में दिलचस्पी हुई। जनसत्ता और नवभारत टाइम्स जैसे अख
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ग़ाजियाबाद में साहित्य की नई धारा बहने लगी है, कवियों और शायरों ने यहां समां बांध रखा है। चाहे कथा संवाद हो या बारादरी, कहानी और शायरी के नए रंग फूटने लगे हैं। कई वरिष्ठ तो कई नए रचनाकारों की सक्रियता ने यहां शब्दों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है। इस बार की बारादरी में मशहूर शायर और कार्यक्रम के अध्यक्ष मोईन शादाब ने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब की महफ़िल 'बारादरी'
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गाजियाबाद में साहित्य की परंपरा को एक अहम मुकाम तक पहुंचाने वाले कथा शिल्पी से रा यात्री की कथा यात्रा के कई पड़ाव रहे। उनकी कहानियों में समाज और सियासत के साथ रिश्तों के इतने शेड्स मिलते हैं कि आज भी इस कथाकार की रचनाशीलता और दृष्टि की गहराई को समझ पाना आसान नहीं है। जीवन के आखिरी दिनों तक से रा यात्री जनतांत्रिक मूल्यों की बात करते रहे, सरकार और व्यवस्था के संवेदनहीन रवैये को लेक
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साहित्य में विवाद अक्सर होते रहे हैं। चाहे लेखन पर, चाहे तथ्यों को पेश करने पर, चाहे भाषा पर या बड़े लेखकों की ज़िंदगी से जुड़ी सच्चाइयों पर। कथा सम्राट प्रेमचंद की ज़िंदगी, उनके लेखन, उनकी सादगी, उनके दर्शन या पत्रकारिता को लेकर बहुत कुछ लिखा, पढ़ा और बोला जाता रहा है। उनका तकरीबन सारा साहित्य उपलब्ध भी है और उनके उपन्यास, कहानियां और लेखन आज भी सबसे ज्यादा पढ़ा भी जाता है और उसपर चर्
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साहित्यकारों, लेखकों के लिए और खासकर साहित्य की सबसे बड़ी अकादेमी के लिए यह विषय अहम है - बदलते दौर में कितना बदला साहित्य। अक्सर इस विषय पर चर्चाएं होती भी रहती हैं, लेकिन इस बार यह खास इसलिए बन गया क्योंकि इसका आयोजन साहित्य अकादेमी ने राष्ट्रपति भवन परिसर के भव्य सांस्कृतिक केन्द्र में हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इसका उद्घाटन किया और संस्कृति मंत्री से लेकर मंत्रालय के
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