संगीत और नृत्य का गहरा नाता है। बिना संगीत के नृत्य नहीं हो सकता। लय और ताल के साथ साथ भाव भंगिमाओं और मुद्राओं का नृत्य में खास महत्व है। खासकर भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की परंपराएं पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं। यहां की नृत्य शैलियों में हमारी पौराणिक कथाएं भी हैं, जीवन दर्शन भी है और सामाजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां भी हैं। कथक, भरतनाट्यम, कथकली, ओड़िसी, मणिपुरी के अलावा लोक व आदिवासी जैसी तमाम ऐसी नृत्य शैलियां हैं जो हमारी संस्कृति को समृद्ध करती हैं। इस खंड में ऐसे तमाम कलाकारों और प्रस्तुतियों की झलक मिलेगी जो आम तौर पर मुख्य धारा की मीडिया में नज़र नहीं आती।

महाभारत की तीन सशक्त महिला किरदारों ने जो किया क्यों किया, उनपर सवाल उठाने वालों को जवाब देने की रचनात्मक कोशिश... देश की शीर्ष नृ्यांगनाओं ने 'स्त्री संपंदन ' के ज़रिये नारी हृदय और उनके फैसलों के पीछे की कहानी को समझने और समझाने का किया जीवंत प्रयास ... कथक गुरु शोवना नारायण, मोहिनीअट्टम की गोपिका वर्मा और ओडिसी की शैरोन लॉवेन का 'स्त्री स्पंदन'
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16 जनवरी 2022 की रात करीब बारह- सवा बारह बजे का वक्त। दिल्ली के अपने घर में पंडित जी अपनी दो पोतियों रागिनी और यशस्विनी के अलावा दो शिष्यों के साथ पुराने फिल्मी गीतों की अंताक्षरी खेल रहे थे। हंसते मुस्कराते, बात बात पर चुटकी लेते पंडित जी को अचानक सांस की तकलीफ हुई और कुछ ही देर में वो सबको अलविदा कह गए। आगामी 4 फरवरी को वो 84 साल के होने वाले थे।
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उनकी शख्सियत में एक खास किस्म की रूमायित और सादगी थी। उनके भीतर इस उम्र में भी एक छोटा बच्चा था। उनके कथक की बारीकियां और उनकी भाव भंगिमाएं तो सबने देखीं और दुनिया ने उन्हें कथक सम्राट का दर्ज़ा भी दिया, लेकिन अस्सी पार करने के बाद भी उनके भीतर का वो बच्चा कृष्ण के नन्हें अवतार की तरह उनके नृत्य में, उनके चेहरे पर, उनकी आंखों में मचलता रहता था। वो कहते और डूब जाते, ‘कान्हा की लीलाएं और च
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आज बेशक नृत्य का अंदाज़ बदल चुका हो और आधुनिक नृत्य के जन्मदाता माने जाने वाले उदय शंकर को लोग न जानते हों, लेकिन जो लोग भी शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों को थोड़ा बहुत जानते समझते और पसंद करते हैं, उनके लिए उदय शंकर का नाम अनजाना नहीं है। सितार के शहंशाह उनके भाई पंडित रविशंकर को लोग खूब जानते हैं लेकिन ये नहीं जानते कि पंडित रविशंकर को उनके बड़े भाई उदय शंकर ने सबसे पहले अपने बैले ट्र
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मशहूर कथक नृत्यांगना पद्मश्री शोवना नारायण ने लॉकडाउन के दौरान कथक को कई नए आयाम देने और ज्यादा से ज्यादा बच्चों और युवाओं तक कथक को पहुंचाने का अभियान चलाया है। सूरज की पहली किरण के साथ उनके पैर थिरकने लगते हैं और देर रात तक डिजिटल क्लास के जरिये वो सैंकड़ों युवा कलाकारों से जुड़ी रहती हैं। देश ही नहीं बाहर के देशों में भी उनसे सीखने वाले पहले से कहीं ज्यादा वक्त अब अपनी प्रतिभा क
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दो-तीन साल पहले जब फिरोज अहमद खान ने बॉलीवुड की बेहद चर्चित फिल्म मुगले आजम’ को रंगमच पर पेश किया तो न सिर्फ फिल्म प्रेमियों को के. आसिफ की उस बहुचर्चित फिल्म की याद फिर से आई बल्कि नाटक की दुनिया में भी उसे एक नए प्रयोग के रूप मे देखा गया। शायद उसी से प्रेरणा लेकर राजीव गोस्वामी ने पिछले हफ्ते जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के विशाल ऑडिटोरियम मेंउमराव जान अदा’ को मंच पर पेश किया जिसमें संग
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कला और संस्कृति के क्षेत्र में मज़बूत दखल रखने वाले पत्रकार आलोक पराड़कर ने पंडित बिरजू महाराज को उनके 80 साल पूरे करने पर किस बारीकी से देखा और महसूस किया, यह उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया। 7 रंग के पाठकों के लिए आलोक पराड़कर को वही आलेख साभार पेश है...
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भरतनाट्यम शैली के अलावा कथक और अन्य नृत्य शैलियों को मिलाकर कुछ नए प्रयोग करने वाली नृत्यांगना लक्ष्मी श्रीवास्तव एक बार फिर अपनी मशहूर नृत्य नाटिक ‘उषा परिणय’ का मंचन करने जा रही हैं। इसका आयोजन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से 13 जुलाई को होने जा रहा है। डॉ योगेश प्रवीण इसके रचनाकार हैं और हेम सिंह ने संगीत दिया है।
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लखनऊ में उत्तर प्रदेश नाटक अकादमी के संत गाडगे सभागार में नृत्य नाटिका ऊषा परिणय का मंचन किया गया। पौराणिक कथा में संगीत नृत्य के अद्भुत संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य नाटिका में वाणासुर, कृष्ण और शिव के मन में ऊषा और अनिरुद्ध कोे परिणय को लेकर चल रहे अंतर्द्वंद की कहानी को दर्शकों के सामने पेश किया गया।
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