
हिन्दी के जिन चार बड़े समकालीन कवियों की चर्चा अक्सर होती है उनमें त्रिलोचन, केदार नाथ अग्रवाल, शमशेर और नागार्जुन शामिल हैं। दरअसल प्रगतिशील धारा के इन कवियों को एक ऐसे दौर का कवि माना जाता है जब देश राजनीतिक उथल-पुथल के साथ तमाम जन आंदोलनों के दौर से गुजर रहा था।
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आज कबीरदास का जन्मदिन है। आम तौर पर कबीरदास को कबीर ही कहते हैं और उनके अनुयायियों को कबीरपंथी। आज जिस सूफ़ी संगीत की दुनिया दीवानी है, वह सूफ़ीवाद भी कबीर से ही आता है। ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर...यानी सबसे प्यार करो, सबकी मदद करो, बहुत की चाह मत करो। कबीर की नज़र में जीवन के अपने मायने हैं और उनके दोहे कहीं न कहीं आपको ब्रह्म और आध्यात्म की व्यावहारिक दुनिया से जोड़ते हैं।
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जाने माने कवि ज्ञानेंद्रपति को इस बार का नागार्जुन सम्मान दिया जा रहा है। इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी मशहूर कवि और निर्णायक मंडल के सदस्य मदन कश्यप ने मीडिया को दी। अपनी अनूठी काव्यभाषा में रचनात्मक प्रतिरोध के लिए सुप्रसिद्ध कवि ज्ञानेन्द्रपति निराला, नागार्जुन और मुक्तिबोध की काव्य संवेदना को विस्तार देने वाले कवि हैं।
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बनारस घराने के कई जाने माने कलाकारों ने संगीत से मुश्किल से मुश्किल बीमारियों के इलाज और इसके असर को लेकर कई अहम बातें कही हैं। इन कलाकारों में उस्ताद बिस्मिल्ला खां की दत्तक पुत्री जानी मानी लोक और शास्त्रीय गायिका पद्मश्री डॉ सोमा घोष और तृप्ति शाक्य के अलावा मशहूर सितारवादक पंडित देवव्रत मिश्र और वायलिनवादक सुखदेव प्रसाद मिश्र, फिल्मकार शुभेन्दु घोष और मानवाधिकार कार्यकर्
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