
आंद्रे बेते नहीं रहे। हिंदी मीडिया के लिए भले ये खबर हो या ना हो या कोई छोटी मामूली सी खबर हो लेकिन एकेडमिक वर्ल्ड में आंद्रे बेते का नहीं रहना एक बहुत बड़ी खबर है और इस बात को दीपांकर गुप्ता ,वीणा दास, अभिजीत पाठक और आनंद कुमार जैसे प्रख्यात समाज शास्त्री समझ सकते हैं जो अभी सक्रिय हैं। भले ही हमारे टीवी एंकरों को न पता हो कि आंद्रे बेते , . कौन थे या यूट्यूबरो को ना पता हो आंद्रे बेते कौ

मैं वही चाणक्य हूँ जिसे आप कौटिल्य भी कहते हो और मुझे विष्णु गुप्त के नाम से भी पुकारते हो। आज मैं बिहार विधानसभा चुनाव होने से पहले राजधानी पाटलिपुत्र से अपना दुख दर्द आपके सामने बयाँ कर रहा हूं। आपको मालूम है कि बिहार में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है और सभी राजनीतिक दलों ने टिकटों की घोषणा भी कर दी है ।इन टिकटो के बंटवारे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान और मतभेद भी साम