
अमेरिका के न्यूयॉर्क में जन्मी स्टैला अगर आज जीवित होती तो वह 126 वर्ष की होती। वे दुनिया की जानी-मानी रंगकर्मी और रंग चिंतक मानी जाती हैं । उनकी एक मशहूर किताब " द आर्ट ऑफ एक्टिंग "रंगकर्म की दुनिया में मील का पत्थर मानी जाती है और सभी रंगकर्मी अपने जीवन में एक बार जरूर इस पुस्तक को पढ़ना चाहते हैं । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कार्यवाहक निदेशक एवं रंग मंडल के प्रमुख रह चुके प्रसिद्ध

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का सातवां "आदि रंग महोत्सव 21 से 23 मार्च तक होने जा रहा है। यह भारत की आदिवासी समुदायों की कला, संस्कृति और धरोहर का उत्सव है। आदि रंग महोत्सव रंगमंच, संगीत, नृत्य, सेमिनार और शिल्प का एक जीवंत संगम है जिसमें लगभग 300 आदिवासी कलाकार होंगे। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने बताया है कि महोत्सव में 13 राज्यों से 15 नृत्य और संगीत प्रस्तुतियाँ तथा 11

ब से भारत रंग महोत्सव (भारंगम) शुरु हुआ है रंगकर्मियों और रंग संस्थाओं के लिए एक बड़े और प्रतिष्ठित मंच पर खुद को अभिव्यक्त करने का मौका मिलने लगा। पच्चीस साल हो गए। 1999 में जब इसकी शुरुआत हुई तो एनएसडी के निदेशक थे रामगोपाल बजाज। पहले भारंगम में गिरीश कर्नाड के नाटक नागमंडल खेला गया था अमाल अल्लाना के निर्देशन में। इसके अलावा भी कई अन्य चर्चित नाटक। इन पच्चीस सालों में अब भारंगम का स

क्या इस क्वारंटीन समय में रंगमंच में कोई नवीनता आ सकती है? बहसें चल रही हैं। कई, बल्र्कि ज्यादातर, रंगकर्मी ऐसे हैं जो भरतमुनि और स्तानिस्लावस्की के सिद्धांतों से टस से मस होने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि थिएटर सिर्फ वास्तविक स्पेस यानी रंगमंच में संभव है और ऑनलाइन थिएटर नाम की कोई चीज संभव नहीं हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो इन दौर में नया प्रयोग कर रहे हैं और वीडियो की तकनी

रंगमंच की दुनिया में नए नए प्रयोगों और कई नए नाटकों के मंचन के साथ 20वां भारत रंग महोत्सव खत्म हो गया। कथक की पाठशाला कहे जाने वाले पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज को इस मौके पर सुनना एक अनुभव था। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से अपने गहरे जुड़ाव और तमाम नृत्यशैलियों के साथ नाटकों की प्रस्तुतियों के बारे में पंडित बिरजू महाराज से बेहतर भला कौन बोल सकता है। आखिरी दिन कमानी सभागार में पंडि

भोपाल के विहान ड्रामा वर्क्स के हाउसफुल प्रोडक्शन- टोटो चान के साथ, बच्चों के अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच उत्सव जश्नेबचपन का 14वां संस्करण आज यहां संपन्न हो गया। बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ रंगमंच के इस नौ-दिवसीय नाट्य उत्सव की शुरुआत जावा के एक संगीतमय नाटक- सूखा पत्ता से हुई थी, जिसमें जीवन की विभिन्न जटिलताओं के बारे में बताया गया था।