
किशोर कुमार के रोमान्टिक गानों के इस दौर और पूर्व-दीप्तियों के बाद के भी शिखर-गीतों के लम्हे कितने ही पुरपेच रहे हों, पर वही उनके फ़राज़ की निशानियों से भरपूर हैं। उनकी अलबेली (शास्त्रीयता से मुक्त) गायिकी की यादें भी बाद की (शास्त्रीयता-युक्त) स्वर- लहरियों और उनके गुनगुने तरन्नुम के साथ दिलों में बसी हैं। खिलंदड़ी सी आवाज़ का बहुआयामी रूप किसी दूसरे कलावन्त को (इतना) उस दौर में कम