
ग़ाजियाबाद में साहित्य की नई धारा बहने लगी है, कवियों और शायरों ने यहां समां बांध रखा है। चाहे कथा संवाद हो या बारादरी, कहानी और शायरी के नए रंग फूटने लगे हैं। कई वरिष्ठ तो कई नए रचनाकारों की सक्रियता ने यहां शब्दों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है। इस बार की बारादरी में मशहूर शायर और कार्यक्रम के अध्यक्ष मोईन शादाब ने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब की महफ़िल 'बारादरी'

परंपरा और सिद्धांत के दायरे से मुक्त लेखन ही कालजई लेखन को जन्म देता है। 'कथा रंग' के 'कथा संवाद' को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं कार्यक्रम अध्यक्ष रवि कुमार सिंह ने कहा कि हर दौर में लेखकों पर अपने परिवेश का दबाव रहता है। लेकिन खास विचारधारा से प्रभावित लेखन न तो अधिक समय तक विमर्श में रहता हैं और न ही इतिहास में जगह बना पाता है। उन्होंने कहा कि रचनाकार को सिद्धांत व परंपरा