संस्कृति अपने आप में बेहद व्यापक शब्द है। इसमें वो तमाम रंग शामिल हैं जो कहीं न कही समाज के मूल्यों, समृद्द परंपराओं और लोक रंगों की खूबसूरत अभिव्यक्ति होते हैं। किसी भी देश की संस्कृति ही वहां की मूल पहचान होती है और इसके अनेक आयाम होते हैं। देश के किसी कोने में वहां की संस्कृति को संवारने और समृद्ध करने की जो भी कोशिश होती है, इससे जुड़े सरकारी- गैरसरकारी जो भी आयोजन होते हैं, नई संस्कृति और जनता से जुड़ी संस्कृति के साथ साथ जो भी नए नए प्रयोग हो रहे हैं, उसे इस मंच के ज़रिये सामने लाना हमारा मकसद है…

सत्तर और अस्सी के दशक तक गांव -गांव 'बाइस्कोप' वाले खूब दिखते थे और उनके पूरे परिवार का पेट इसकी कमाई से चल जाता था । कालान्तर में टीवी, इंटरनेट, डीवीडी - सीडी , मोबाइल फोन आदि ने 'बाइस्कोप' का क्रेज प्रायः खत्म ही कर दिया। ' बाइस्कोप ' वालों ने शहर छोड़ दूर - दराज गांवों का रुख करना शुरू किया, लेकिन वहां भी उन्हें देखने वाले मुश्किल से मिलते हैं।
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आज के दौर में अगर लघु पत्रिका और खासकर इस विषय पर केन्द्रित एक पत्रिका को निकालने की हिम्मत जुटाना आसान काम नहीं। लेकिन युवा पत्रकार आलोक पराड़कर की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने अपने इस जज़्बे को बरकरार रखते हुए ‘नाद रंग’ निकालने का साहस किया। व्यावसायिकता और बाज़ारीकरण के इस दौर में पत्रिका निकाल पाना और उसे चला पाना कठिन चुनौती है और खासकर तब भी जब ‘डिजिटल युग’ और ‘मोबाइलीकरण’ न
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साहित्य कला परिषद के आगामी नाट्य समारोहों के लिए कलाकारों से जो प्रविष्ठियां मांगी गई हैं, उनकी शर्तें अगर पढ़िए तो साफ लगेगा कि अब सरकार कंटेंट अपने मतलब का चाहती है, स्क्रिप्ट वैसा ही चाहिए जो सरकार की नीतियों की तारीफ करे। इसके खिलाफ दिल्ली के युवा रंगकर्मियों में असंतोष है। मशहूर रंगकर्मी, निर्देशक और जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर नाटक करने वाली संस्था अस्मिता के संस्थापक
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इस बार ललित कला अकादमी के प्रशासक कोई नौकरशाह नहीं हैं, एक कलाकार हैं। मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले सी एस कृष्णा सेट्टि को दिल्ली बुलाकर यह बड़ी ज़िम्मेदारी दे तो दी गई है लेकिन फिलहाल अकादमी के पुराने लोगों को साथ लेकर चलना उनके लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा है। सेट्टि चाहते हैं कि कम से कम अब ललित कला अकादमी भ्रष्टाचार और गुटबाजी से मुक्त हो जाए... सी एस कृष्णा सेट्टि से बातचीत
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सुरेन्द्र पाल जोशी के हज़ारों पेंटिग्स, कला के तमाम प्रयोग और उनकी खुद की गैलरी में घूमते हुए आपको उनके कई आयाम देखने को मिलेंगे। इसकी एक झलक 7 रंग आपके लिए लाया है…
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कला में अपने अनूठे प्रयोगों के लिए मशहूर हो चुके सुरेन्द्र पाल जोशी की नई कृति ‘मैपिंग द स्पेस’ ने इन दिनों कला जगत में धूम मचा रखी है। इसके तहत इस बार उन्होंने करीब एक लाख सेफ्टीपिन्स का इस्तेमाल करेक एक विशालकाय हेलीकॉप्टर बनाया है।
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मुख्य धारा की पत्रकारिता से किस तरह कला और संस्कृति हाशिये पर चली गई है और इसे कैसे मीडिया में सम्मानजनक जगह दिलाई जाए, इसे लेकर ललित कला अकादमी खासा चिंतित है। अकादमी ने इस बारे में चिंतन और कारगर पहल करने के मकसद से दिल्ली में भारतीय भाषाओं के करीब 50 कला लेखकों का एक सम्मेलन किया।
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अंडमान निकोबार द्वीप समूह बाहर की दुनिया के लिए किसे अजूबे से कम नहीं। आम तौर पर सैलानियों के लिए यहां के खूबसूरत समुद्र तट और ऐतिहासिक सेलुलर जेल की तस्वीरें आकर्षण की मुख्य वजह है। जो पारंपिरक किस्म के सैलानी हैं वो सेलुलर जेल यानी कि अंग्रेज़ों के ज़माने में ‘काला पानी’ के नाम से मशहूर इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने आते हैं और देशभक्ति की तमाम कहानियां सुनते हैं और उन जननायकों को य
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एनजीएमए को नौकरशाही की गिरफ्त से मुक्त करने के लिए सरकार ने पहली बार एक कलाकार को यहां का महानिदेशक बनाया है। उड़ीसा के इस चर्चित कलाकार और मूर्तिकार अद्वैत गणनायक के मूर्तिशिल्प की झलक आपको कई जगह देखने को मिल जाएगी। राजघाट पर गांधी के डांडी मार्च पर उनका शिल्प सबको खींचता है, ललित कला अकादमी में ‘माई टेम्पल’ और नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट में ‘फाइव एलिमेंट्स’ जैसी उनकी कृतियां ल
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