कहते हैं कि जहां संगीत नहीं है, वहां जीवन नहीं है। लय और ताल के बगैर सुर नहीं बनते और मन की गहराइयों तक उतर जाने वाला संगीत नहीं बन सकता।गीत-संगीत किसी भी संस्कृति का सबसे ज़रूरी हिस्सा है और ये एक ऐसी विधा है जो आपको एक सुकून भरे एहसास से भर देती है। दुनिया के निर्माण के साथ ही संगीत का जन्म भी हुआ और तमाम दौर से गुज़रते हुए संगीत में नए नए प्रयोग होते रहे। पारंपरिक वाद्यों से लेकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वाद्यों तक और गायन की तमाम शैलियों से लेकर नए दौर के प्रयोगों तक संगीत हरेक के जीवन का ज़रूरी हिस्सा है – चाहे वो शास्त्रीय संगीत हो, लोक संगीत हो या फिर फ़िल्म संगीत।देश के तमाम हिस्सों में संगीत से जुड़े आयोजनों, कलाकारों, नए प्रयोगों के साथ साथ इस दिशा में होने वाली हर तरह की गतिविधि को समेटने की कोशिश हम करेंगे।


संगीत
जहां ग़म भी न हो, आंसू भी न हो…
7 Rang
October 13, 2017

एक ऐसी दुनिया की कल्पना, एक ऐसे खुशनुमा समाज का सपना और हर तरफ प्यार ही प्यार की तमन्ना लिए 58 साल की उम्र में किशोर दा ने बेशक सबको अलविदा कह दिया हो, लेकिन वो हमेशा सबके बीच हैं... उसी तरन्नुम में, उसी अंदाज़ में और अपने उन्हीं खूसूरत सपनों के साथ....  उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने उन्हें इस लायक बनाया, उनकी प्रतिभा को मंच दिया, तमाम मौके दिए और किशोर को किशोर बनाया... संयोग देखिए दादा मुनि  के ज

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ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया…
7 Rang
October 7, 2017

जब भी ग़ज़ल, ठुमरी और दादरा की चर्चा होती है, बेग़म अख़्तर का नाम सबसे पहले ज़हन में आता है। 103 साल पहले 7 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद में अख़्तरी बाई ने एक कुलीन परिवार में जन्म लिया। बेग़म अख्तर की जिंदगी के अगर पन्ने पलटिए तो उसमें कई शेड्स मिलेंगे। कुछ उदासीन, तकलीफ़ों और अभावों से भरी।

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इतने रंग एक साथ – ‘नाद रंग’ पढ़िए
7 Rang
October 4, 2017

आज के दौर में अगर लघु पत्रिका और खासकर इस विषय पर केन्द्रित एक पत्रिका को निकालने की हिम्मत जुटाना आसान काम नहीं। लेकिन युवा पत्रकार आलोक पराड़कर की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने अपने इस जज़्बे को बरकरार रखते हुए ‘नाद रंग’ निकालने का साहस किया। व्यावसायिकता और बाज़ारीकरण के इस दौर में पत्रिका निकाल पाना और उसे चला पाना कठिन चुनौती है और खासकर तब भी जब ‘डिजिटल युग’ और ‘मोबाइलीकरण’ न

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‘7 रंग’ अपनी मुहिम में कामयाब होगा – कैलाश खेर
7 Rang
December 24, 2016

कैलाश खेर को जब भी आप सुनेंगे, एक अलग दुनिया में पहुंच जाएंगे। अपनी धुन का पक्का एक अकेला ऐसा शख्स जो आज अपने दम पर संगीत की दुनिया में वो मुकाम हासिल कर चुका है जिसकी मुरीद पूरी दुनिया है। 7 रंग के संपादक अतुल सिन्हा के साथ बेहद आत्मीय और दोस्ताना अंदाज़ में कैलाश खेर मिलते हैं। बातचीत के अंदाज़ में वही बिंदासपन और फक्कड़पन जो उनके गीतों में नज़र आता है।

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जश्न-ए-रेख़्ता 17 फरवरी 2017 से दिल्ली में
mm Indianartforms
November 29, 2016

जश्न-ए-रेख़्ता, ३ दिवसीय वार्षिक महोत्सव जिसके जरिए उर्दू भाषा के जन्म और विकास का जश्न मनाया जाएगा। इस महोत्सव के जरिए ऊर्दू भाषा के जन्म और भारतीय उपमहाद्वीप में उसके विकास की सराहना और इसकी सुंदरता और बहुमुखी प्रतिभा के प्रति जागरुकता पैदा करना है।

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अस्सी पर सुबह-ए-बनारस
mm Indianartforms
January 30, 2016

दशाश्वमेध घाट और गंगा आरती के विहंगम और मनमोहक दृश्यों वाली काशी आखिर अचानक अपनी खालिस देसी गालियों के लिए खबरों में कैसे आ गई? दशाश्वमेध और अस्सी के बीच का फ़ासला बमुश्किल पांच किलोमीटर का होगा लेकिन यहां तक आते आते पूरी की पूरी संस्कृति आखिर कैसे बदल जाती है? गंगा भी वही है, गंदगी भी वैसी ही है लेकिन अल्हड़ और मस्त अंदाज़ के साथ साहित्य और संस्कृति का अनोखा मेल आखिर अस्सी पर ही क्य

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