दुनिया एक रंगमंच है और हमसब इस रंगमंच की कठपुतलियां हैं। किसी ने ये पंक्तियां यूं ही नहीं कह दीं। अगर आप गहराई से देखें तो हम सब कहीं न कहीं ज़िन्दगी में हर रोज़ कोई न कोई किरदार होते हैं और हर पल हमारे हाव भाव, बोलचाल का अंदाज़ और तमाम घटनाक्रमों के बीच हमारी भूमिका एक नई कहानी गढ़ती है। भारतीय रंगमंच की परंपरा बेहद समृद्ध है और ये कहीं न कहीं हमारे जीवन के तमाम पहलुओं को स्वांग के ज़रिये सामने लाती है। फिल्मों और टेलीविज़न के आने के बाद से रंगमंच की दुनिया में हलचल मच गई और इसके अस्तित्व पर सवाल उठाए जाने लगे। लेकिन हर दौर में देश के तमाम हिस्सों में रंगमंच उसी शिद्दत के साथ मौजूद है और रहेगा। इसकी अपनी दुनिया है और अपने दर्शक हैं। यहां भी नए नए प्रयोग होते रहते हैं और देश भर में लगातार नाटकों का मंचन होता रहता है। कहां क्या हो रहा है, रंगमंच आज किस दौर में है, कौन कौन से प्रयोग हो रहे हैं, कलाकारों की स्थिति क्या है, पारंपरिक और लोक रंगमंच आज कहां खड़ा है – ऐसी तमाम जानकारियां इस खंड में।

साहित्योत्सव के पांचवे दिन हिंदी के प्रख्यात लेखक एवम नाटककार मोहन राकेश को उनकी जन्मशताब्दी पर याद किया गया और सवाल उठा कि क्या उनकी रचनाओं का मूल्यांकन उनके जीवन की घटनाओं के आधार पर होना चाहिए या उनके लिखे पर ? सवाल यह भी उठा कि क्या वे अपनी रचनाओं में स्त्री विरोधी थे?
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17 दिनों से राजधानी मेंधूमधाम से चल रहा भारत रंग महोत्सव एनएसडी पर डाक टिकट जारी होने और प्रख्यात लेखक धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध कृति कनुप्रिया के मंचन के साथ समाप्त हो गया। दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने समारोह में डाक टिकट जारी किया और अपने भाषण में पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का नाम न लेते हुए उनकी जबरदस्त खिंचाई की। उन्हें ऐसा फ्लॉप अभिनेता बताया जिसे जन
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भारंगम की शुरुआत तीन दिन पहले हो चुकी है और अब लोगों की निगाह महिला निर्देशकों पर केंद्रित हो रही है। इस बार भारंगम में 24 महिला निर्देशकों के नाटक हो रहे हैं। गुरुवार को प्रसिद्ध रंगकर्मी हेमा सिंह के नाटक से इसकी विधिवत शुरुआत हो चुकी है। हेमा सिंह ने हिंदुस्तानी में आगा हश्र कश्मीरी के नाटक "ख्वाब ए हस्ती" का मंचन किया।
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भारत रंग महोत्सव के दूसरे दिन लोकरंग कार्यक्रम में संजय उपाध्याय के निर्देशन में नाटक बिदेसिया का 856 वीं बार मंचन किया गया। इस दौरान दर्शकों ने तालियों और सीटियों से समां बांध दिया। एनएसडी के मुक्ताकाश मंच पर शाम सात बजे इस नाटक को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। इसका एक कारण तो यह भी रहा होगा कि यह नाटक निःशुल्क था पर इस नाटक की अपार सफलता से कुछ सवाल भी उठे। वरिष्ठ पत्रकार लेखक अरविंद कु
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भारत रंग महोत्सव के 25वें संस्करण की शुरुआत हो गई... दिल्ली में चुनाव की वजह से इसका उद्घाटन कमानी ऑडिटोरियम में न होकर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कैंपस में ही हुआ...इस बार के रंगदूत बनाए गए अभिनेता राजपाल यादव ने तालियां बटोरीं.. मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के आने का लंबा इंतज़ार हुआ, आखिरकार उद्घाटन के बगैर नाटक रंग चिंतन शुरु हो गया... मंत्री जी आए तो लेकिन काफी देर से.. मंच पर संस्कार
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 144 साल बाद हो रहे महाकुंम्भ में "भारंगम" (भारतीय रंग महोत्सव) के एक नाटक ने लोगों का दिल जीत लिया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी द्वारा निर्देशित नाटक "समुद्रमंथन " पिछले दिनों देश विदेश से आये लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।गत वर्ष भारंगम का उद्घटान इसी नाटक से हुआ था।
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ब से भारत रंग महोत्सव (भारंगम) शुरु हुआ है रंगकर्मियों और रंग संस्थाओं के लिए एक बड़े और प्रतिष्ठित मंच पर खुद को अभिव्यक्त करने का मौका मिलने लगा। पच्चीस साल हो गए। 1999 में जब इसकी शुरुआत हुई तो एनएसडी के निदेशक थे रामगोपाल बजाज। पहले भारंगम में गिरीश कर्नाड के नाटक नागमंडल खेला गया था अमाल अल्लाना के निर्देशन में। इसके अलावा भी कई अन्य चर्चित नाटक। इन पच्चीस सालों में अब भारंगम का स
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वसुधैव कुटुंबकम का संदेश फैलाने के लिए दुनिया में नाटकों का सबसे बड़ा आयोजन “भारत रंग महोत्सव “(भारंगम) इस साल 28 जनवरी से शुरू होगा और बीस दिनों तक चलेगा और पहली बार देश से बाहर विदेश की धरती पर भी होगा। प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता एवम एनएसडी के पूर्व छात्र राजपाल यादव इस साल भारंगम के “रंगदूत” बनाये गए हैं।
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जाने माने रंगकर्मी और नाटकों के शिल्प से लेकर कथ्य तक को बेहद समृद्ध करने वाले हबीब तनवीर की याद में हर साल दिए जाने वाले कारवां-ए-हबीब सम्मान इस साल मशहूर नाट्य समीक्षक और लेखक डॉ जयदेव तनेजा को दिया जाएगा। सत्तर और अस्सी के दशक से लेकर अबतक जयदेव तनेजा ने रंगकर्म के क्षेत्र में जबरदस्त काम किया है और उनके लेख और नाट्य समीक्षाएं जनसत्ता, नवभारत टाइम्स समेत देश के तमाम प्रतिष्ठित अ
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