उन शख्सियतों की यादें जिन्होंने साहित्य, कला, संस्कृति के क्षेत्र में अहम मुकाम हासिल किए…


यादें
कोई भी संस्कृति बगैर कविता के फल फूल नहीं सकती – त्रिलोचन
7 Rang
August 20, 2025

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एक जबरदस्त पटकथा में छिपे ‘शोले’
7 Rang
August 20, 2025

एक ऐसी फिल्म जिसने लगातार पचास सालों तक अपनी अहमियत बनाए रखी और अबतक की सबसे सुपर डुपर हिट फिल्म साबित हुई। शोले के पचास साल पर बहुत कुछ लिखा जा रहा है। हरेक के अपने अनुभव हैं, हर किरदार के अपने मायने हैं। अपना अपना नज़रिया भी है। तो 7 रंग के पाठकों के लिए इस फिल्म के बारे में जाने माने लेखक और फिल्म पत्रकार प्रताप सिंह की किताब सिनेमा का जादुई सफ़र के कुछ हिस्से भी ज़रूर पठनीय होंगे।

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 हिन्दी गीतों में “यूडलिंग ” का आगमन और बादशाहत…    
7 Rang
August 4, 2025

किशोर कुमार के गीतों में यूडलिंग का इस्तेमाल कैसे हुआ और कैसे किशोर दा ने फिल्म झुमरू में इसका ऐसा प्रयोग किया कि वह आज तक तमाम गायकों के लिए एक मिसाल है... ऐसे तमाम पहलुओं पर, किशोर कुमार को पहचान देने वाली फिल्मों पर और बड़े भाई अशोक कुमार के साथ उनके रिश्तों पर पेश है ये चौथी कड़ी.... प्रताप सिंह की कलम से 

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वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
7 Rang
August 3, 2025

यह हमें याद रखना चाहिए गमगीन-गीतों की शबाहत {FORM} को अपने हुनर का रंग देने में माहिर किशोर दा का मूल स्वर शोक-गीतों के लिए नहीं है। उनकी पहचान रोमांटिक -मूड के गीतों पर कहीं ज्यादा निर्भर रही। दो अलग पीढ़ियों के सुपर-स्टार देवानन्द और राजेश खन्ना के लिए ‘रोमांटिक- मूड और जवां- दिलों’ को जगाते गीतों में किशोर कुमार की आवाज़ ज्यादा फबती रही। फिल्म तीन देवियाँ  का--अरे यार ! मेरी तुम भी हो..गज़ब !

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किशोर कुमार: हरफ़नमौला ज़िन्दगी की सिम्फ़नी
7 Rang
August 3, 2025

 किशोर कुमार के रोमान्टिक गानों के इस दौर और पूर्व-दीप्तियों के बाद के भी  शिखर-गीतों के लम्हे कितने ही पुरपेच रहे हों, पर वही उनके फ़राज़ की  निशानियों से भरपूर हैं। उनकी अलबेली (शास्त्रीयता से मुक्त) गायिकी की यादें  भी बाद की (शास्त्रीयता-युक्त) स्वर- लहरियों और उनके गुनगुने तरन्नुम के साथ  दिलों में बसी हैं। खिलंदड़ी सी आवाज़ का बहुआयामी रूप किसी दूसरे कलावन्त को (इतना) उस दौर में कम

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किशोर कुमार : एक अनूठे गायक की अज़ीम गायिकी के अक्स
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August 3, 2025

सदाबहार किशोर कुमार 4 अगस्त 1929 को खंडवा में जन्मे थे और उन्होंने फिल्म संगीत की दुनिया में जो कमाल किया, उसे बताने की ज़रूरत नहीं। किशोर कुमार की जयंती के मौके पर जाने माने लेखक-फिल्म पत्रकार और फिल्मों की गहरी समझ रखने वाले प्रताप सिंह ने अपनी किताब 'इन जैसा कोई दूसरा नहीं' में संपूर्णता से याद किया है। तमाम पहलू हैं किशोर दा के। 7 रंग के पाठकों के लिए प्रताप सिंह के आलेख को चार खंडों म

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एक उपेक्षित महानायक की खोज : प्यासा
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July 17, 2025

गुरुदत्त ने जो फिल्में कीं, जिन कहानियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ परदे पर उतारा, जिन पात्रों को जिया और दुनिया की जिन सच्चाइयों को सामने ले कर आए, वह अपने आप में किसी अंतहीन मिसाल से कम नहीं.... उनके पूरे कामकाज पर , किरदारों पर, फिल्मों के विस्तृत फलक पर जाने माने लेखक और क्लासिक फिल्मों को गहराई तक समझने, परखने वाले प्रताप सिंह ने अपनी किताब सिनेमा का जादुई सफ़र में बहुत विस्तार से ल

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बलराज साहनी : कई चेहरों वाली शख़्सीयत
7 Rang
April 13, 2025

944 की गर्मियाँ...। रावलपिंडी स्टेशन पर एक बड़ी भीड़ फ्रंटियर मेल का इंतजार कर रही थी। शहर का एक होनहार युवा बी.बी.सी., लंदन की नौकरी से वापस लौट रहा था। वहाँ के लिए यह एक गर्व की बात थी। स्टेशन पर युवक के माता-पिता, भाई, रिश्तेदार उसके दोस्त और रावलपिंडी के कई महत्त्वपूर्ण लोग हाथों में फूलों की मालाएँ लिए उसका स्वागत करने के लिए बेचैन हो रहे थे...। तभी ट्रेन आकर रूकी.... सब फर्स्ट क्लास के डिब्ब

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वसंत साठे की जन्मशती पर क्या बोले आरिफ मोहम्मद खां
7 Rang
March 5, 2025

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राजनीति के बगैर रेणु , ये रेणु न होते…
7 Rang
March 4, 2025

हमारे दो बड़े लेखक -फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन- बिहार के मिथिलांचल से थे। इनका मिथिलांचंली होना एक संयोग था मगर असली समानता उनमें दोनोंं लेखकों की विचार और कर्म के स्तर पर सक्रिय राजनीतिक सक्रियता थी। शायद रेणु की सक्रियता  ज्यादा थे। नागार्जुन यायावर थे, देशभर में घूमते रहते थे मगर रेणु को आना-जाना सामान्य रूप से ही प्रिय था(याद करें 'ऋणजल' के वे अंश जब सूखे की कवरेज के लिए आये ' द

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