कला के कई रूप हैं। रंगों की अपनी भाषा है। रेखाएं बोलती हैं। कलाकृतियां कुछ कहती हैं। चित्रों के पीछे पूरा एक दर्शन छुपा होता है और रंगों के संयोजन के पीछे कहीं न कहीं कोई कल्पना होती है। देशभर में कलाकार तो भरे पड़े हैं, दिल्ली, मुंबई समेत तमाम बड़े शहरों में बनी आर्ट गैलरी किसी न किसी कलाकार के काम का एक बेहतरीन आईना भी हैं। लेकिन तमाम कलाकारों का दर्द है कि इस देश में कला की कद्र नहीं। तमाम अकादमियां हैं, आर्ट और स्कल्पचर के तमाम कॉलेज हैं, बड़ी संख्या में यहां ये हुनर सीखने वाले भी हैं लेकिन ऐसा क्या है जो कलाकारों के भीतर उपेक्षा का भाव भरता है। हमारा मकसद इन सवालों पर बहस के साथ साथ देश भर के उन कलाकारों को मंच देना है और उनके काम को एक बड़ा आयाम देना है जो महज गैलरी में सिमट कर रह जाते हैं और चंद पेंटिग्स के बिक जाने का इंतज़ार भर करते हैं। कला के क्षेत्र में नया क्या हो रहा है, नई पीढ़ी के कलाकार क्या कर रहे हैं और जाने माने कलाकारों के काम को दुनिया किस तरह देख रही है – ये सब हम बताने की कोशिश करेंगे।


कला
बोधगया बिनाले में युवा कलाकारों का बोलबाला
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December 20, 2016

यह एक तथ्य है कि पलायन जिन कारणों व जिन स्थितियों में भी होता है, उसका एक पक्ष यह भी है कि मनुष्य जहाँ भी जाता है उसकी अन्तःचेतना में उसका मूल स्थान यादों के रूप में अन्तर्निहित रहता है। इस बारे में मुरारी कहते हैं कि सिर्फ एक व्यक्ति विस्थापित नहीं होता बल्कि वह अपने साथ सदियों से चली आ रही संस्कृति का भी विस्थापन करता है,

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बोधगया बिनाले में ‘मैन विद सिंगिंग बाउल’
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December 19, 2016

समाज में जाति व्यवस्था को किस तरह से देखा जाता है और किसी अन्य पंथ को अपनाने के बावजूद उस व्यक्ति की जिंदगी पर किस तरह से उससे पूर्व की जाति एवं कर्मों का असर रहता है, क्या यह कला का विषय हो सकता है। बोधगया बिनाले में इसी को आधार बनाकर युवा कलाकार बी. अजय शर्मा ने समाज को गहरा संदेश देने की कोशिश की जिनकी प्रस्तुति का टाइटल था मैन विद सिंगिंग बाउल।

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बोधगया बिनाले में दिखा अदभुत बिहार
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December 19, 2016

बोधगया बिनाले में रविवार का दिन बिहार और कश्मीर के कलाकारों के नाम रहा और कई महत्वपूर्ण लोगों की आवाजाही बनी रही। जानी-मानी सिने तारिका सारिका ने भी कलाकृतियों को देखा और सराहा। सारिका ने बाइस्कोप प्रदर्शनी की औपचारिक शुरुआत करते हुए कहा कि बोधगया बिनाले एक महत्वपूर्ण कला आयोजन है और लोगों को इसे देखना चाहिए। सारिका खासतौर पर बिहार की लोककला से प्रभावित दिखीं।

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बोध गया में कला का महाकुंभ
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December 18, 2016

17 दिसंबर से 23 दिसंबर तक सुजाता विहार में आयोजित बोधगया बिनाले एक क्यूरेटेड प्रदर्शनी है जिसमें करीब 30 देशों के 99 वरिष्ठ एवं युवा कलाकारों शिरकत कर रहे हैं। एक प्रदर्शनी में 120 से ज्यादा कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनमें आधुनिक कला एवं परंपरागत कला, दोनों ही तरह की कलाकृतियां शामिल हैं।

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ममता का रंग आज भी हरा है…
mm Indian Art Forms
December 11, 2016

'जिसका मन रंगरेज' देव प्रकाश चौधरी की चौथी किताब है। जितने खूबसूरत अंदाज में यह किताब लिखी गई है, किताब का डिजाइन भी उतना ही शानदार है। सिलसिलेवार तरीके से यह किताब अर्पणा कौर के जीवन, संघर्ष और चित्रकार के रूप में सफलता को बयां करती है। इसे पढ़ते हुए पाठक को महसूस होगा कि वह अर्पणा कौर पर कोई डॉक्यूमेंट्री देख रहा है।

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जहां दीवारें बोलती हैं…
mm Indianartforms
November 29, 2016

दीवार पर उकेरे गए सात रंग और हर एक रंग की अलग कहानी। रचनात्मकता का मिश्रण और अभिव्यक्ति की आज़ादी, ये कुछ तस्वीरें अपने आप में बहुत कुछ बयां कर जाती हैं। राजधानी दिल्ली की चकाचौंध और भागदौड़ के बीच एक छोटा सा इलाका है शाहपुर जट, कहनेवाले तो इसे गांव भी कहते हैं लेकिन इन छोटी छोटी इमारतों और पतली गलियों में गांव जैसा कुछ रह नहीं गया है।

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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की सूरत बदलेगी
mm Indian Art Forms
April 14, 2016

कला और संस्कृति के प्रतिष्ठित सरकारी केंद्र की ज़िम्मेदारी सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय को सौंपी है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के बोर्ड को भंग कर संस्कृति मंत्रालय ने पद्मश्री और वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय को इस केंद्र का नया प्रमुख बनाया है. बोर्ड में कला और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े 20 सदस्य होते हैं।

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बदलते दौर में कठपुतली कला को बचाने की कोशिश
mm Indianartforms
November 11, 2015

क्या आज कठपुतली कला कहीं गुम हो रही है या फिर इसमें नए प्रयोग किए जा रहे हैं... तमाम लोक कलाओं की तरह कठपुतली को लेकर जो चिंता इससे जुड़े कलाकार जताते रहे हैं, उनमें आज के दौर के हिसाब से क्या सचमुच बदलाव आ रहा है.. ये तमाम सवाल जब हमने कठपुतली को बचाने और इसके विकास के लिए काम कर रहे दादी पदुमजी से पूछे तो उनके चेहरे पर कोई खास उत्साह के भाव नहीं दिखे।

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