कैमरे में उतरा चिकनकारी का दर्द…



लखनऊ की मशहूर चिकनकारी को दुनिया भर में पहचान मिली है लेकिन चिकन के काम में लगे कलाकारों के जीवन और उनके दर्द को कोई नहीं जानता। हज़ारों हुनरमंद हाथ आज किस तरह अपना जीवन काटते हैं और कैसे उनके हुनर को बड़े व्यवसायी अपने लिए इस्तेमाल करते हैं.. इस पूरी यात्रा को एक युवा फोटोग्राफर अविरल सेन सक्सेना ने अपने कैमरे में बहुत करीब से देखा है। अविरल की पहली फोटो प्रदर्शनी ‘द लूज़िंग थ्रेड’ 14 जनवरी से 16 जनवरी तक लखनऊ की कला श्रोत गैलरी में देखी जा सकती है। मशहूर लेखक और संस्कृति के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले यतीन्द्र मिश्र की संस्था कर्टेन रेज़र इस प्रदर्शनी का आयोजन कर रही है।

यतीन्द्र मिश्र ने अविरल की तस्वीरों को बेहद करीब से देखा औऱ महसूस किया है। उन्होंने अपनी शानदार अभिव्यक्ति के साथ इन तस्वीरों में रची बसी आत्मा को शब्दों में बांधा है। इस पूरी प्रदर्शनी में आपको चिकन कलाकारों के हर उस दर्द का एहसास होगा जिससे वो रोज़ दो-चार होते हैं, साथ ही इस हुनर की बारीकियों का भी एहसास होगा।

अविरल सेन सक्सेना अपने कैमरे के साथ इस खास प्रोजेक्ट पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। आम तौर पर आज के दौर में जहां हर हाथ में मोबाइल कैमरे हों और हर कोई फोटोग्राफर हो…एक फोटोग्राफर के लिए अपनी पहचान बनाना बहुत मुश्किल हो रहा है। जाहिर है अविरल ने इसके लिए अपनी नई दृष्टि विकसित की और ऐसे विषय चुनकर खुद को अलग तरीके से स्थापित करने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे में कर्टेन रेज़र जैसी संस्था का उनके साथ जुड़ना और उन्हें एक बड़ा मंच देना बेशक एक उपलब्धि है।

इन चित्रों को हम और विस्तार से दिखाएंगे और इसकी अंतरकथा बताएंगे, इस प्रदर्शनी के बाद।

Posted Date:

January 14, 2019

9:29 am Tags: , , , , , ,

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