बीते जमाने की मशहूर शास्त्रीय गायिका असगरी बाई ने मालिनी अवस्थी को एक बार पान का बीड़ा देते हुए कहा कहा कि पान खाते समय तीन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए।पहली बात तो यह कि किसी भी व्यक्ति का दिया पान नहीं खाना चाहिए और खाने से पहले सबसे पहले उसे खोलकर देख लेना चाहिए कहीं उसमें कुछ मिलाया तो नहीं गया है। पद्मश्री से सम्मानित लोग गायिका मालिनी अवस्थी ने भारंगम के श्रुति प्रोग्राम में अपनी पुस्तक चंदन किवाड़ पर चर्चा के दौरान यह रोचक किस्सा सुनाया।
उन्होंने कहा कि जब वह एक बार टीकमगढ़ गई थी तो पता चला कि असगरी बाई वहीं रहती हैं। एक कमरे के फ्लैट में तो वह उनसे मिलने चली गई। मैंने उन्हें झुक कर नमस्कार किया और फिर थोड़ी बातचीत की। बातचीत के दौरान मैंने उन्हें बताया कि थोड़ा-बहुत गाती हूँ तो उन्होंने और दिलचस्पी ली। फिर तो हम दोनों ने एक दूसरे को अपना गाना भी सुनाया।
जाते समय उन्होंने मुझे आशीर्वाद के रूप में मुझे पान का एक बीड़ा दिया तो मैंने उसे अहो भाग्य मानकर स्वीकार कर लिया। तब असगरी बाई ने मुझे पान खाने को लेकर तीन हिदायतें दीं। पहली हिदायत यह कि जब भी तुमको कोई आदमी तुम्हे पान दे तो सबका दिया हुआ पान तुम मत खाना और अगर किसी व्यक्ति से पान लेकर खाना भी, तो पहले उसे खोलकर देख लेना कि उसमें कोई सिंदूर या पारा तो नहीं डाला गया है क्योंकि यह सब कलाकार के गले को नुकसान पहुंचाते हैं। पहले कलाकारों के साथ ऐसे हादसे होते थे। उन्होंने कहा कि असगरी बाई के उस पान के बीड़े को वह आज तक नहीं भूली हैं।
दुनिया के कई देशों में अपने शो कर चुकी मालिनी ने इस कार्यक्रम में अपनी किताब ” चंदन किवाड़ ” के बारे में विस्तार से बातचीत की और बताया कि यह किताब उनकी कोई आत्मकथा नहीं है पर इसमें उनके जीवन के बहुत सारे प्रसंग हैं और उनके कलाकार बनने के संघर्ष की कथा भी है। साथ ही लोगों ने उन्हें जो प्यार और सम्मान दिया उसकी भी कहानी है और इसमें उन्होंने अपने गुरुओं को भी याद किया है कि किस तरह उन्होंने उनसे गायिकी सीखी और आज मैंने जो कुछ सीखा और पाया है, उनकी ही बदौलत। पहले तो गुरु शिष्यों को डांट देते थे।
श्रीमती अवस्थी ने यह भी बताया कि किस तरह उनके खानदान के लोग लड़कियों को स्टेज पर भेजने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने बताया कि किस तरह उनकी शादी हुई और शादी के बाद किस तरह उन्होंने अपनी गायकी को बरकार रखा और अपने जीवन में उपलब्धियां हासिल की। उनका कहना था कि एक महिला के लिए घर गृहस्थी के साथ कलाकार बनाना अधिक कठिन है पर कलाकार के भीतर की जिद उसे कलाकार बनाती है। अक्सर महिलाएं यह कहती हैं कि उनकी सास या उनके पति ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया लेकिन अगर किसी स्त्री के भीतर कुछ करने की जिद हो तो वह सब कुछ हासिल कर डालती है और बाद में उसकी सास और पति भी उसे सहयोग देते हैं।
श्रीमती अवस्थी ने अपने गुरु राहत अली का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह वह अपनी मां के साथ गोरखपुर उनसे प्रशिक्षण लेने जाती थी और हर शनिवार को लखनऊ से निकलती थीं और फिर सोमवार को वापस आ जाती थी और यह सिलसिला सालों तक चला। यहां तक कि राहत अली उनके लिए शनिवार और रविवार को बाहर किसी कंसर्ट में भी नहीं जाते थे।
उन्होंने यह भी बताया कि एक बार उनके गुरु राहत अली ने लखनऊ में अपने उस्ताद से उन्हें मिलवाया था और किस तरह वह सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गई थी और वहां उन्होंने उनके सामने अपनी गायकी का नमूना पेश किया तो वे बड़े प्रसन्न हुए थे और उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया था।
उतरते समय मेरे उस्ताद ने सीढ़ियों को हाथों से छूकर उसे चूमा भी तो मैंने भी सीढ़ियों को छूकर चूमा और यह घटना मुझे आज भी याद है ।मेरी किताब में जब मेरे जीवन के इन प्रसंगों को मेरे पति ने पढ़ा तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। मेरे पति इतने व्यस्त रहते थे कि एक तो उन्हें कुछ याद भी नहीं रहता था कि मैं उनके साथ कहां-कहां संगीत की प्रस्तुति देने गईं तो क्या हुआ।
संगीत नाटक अकादमी और कालिदास सम्मान से सम्मानित मालिनी अवस्थी ने समारोह में एक बार रायबरेली के कार्यक्रम का भी जिक्र किया और बताया कि जब वह एक समारोह में गई थीं तो करीब 80 वर्ष की एक बूढ़ी महिला उनके स्टेज के आगे आकर कोने पर बैठ गई और उन्होंने उनसे कहा कि तुम गिरिजा से मिलना तो कहना कि छून्नू तुम्हें याद कर रही थी। मैंने सोचा कि यह कौन महिला है जो मेरी गुरु गिरिजा देवी जैसी बड़ी गायिका को गिरिजा के नाम से संबोधित कर रही है। जब मैं उनसे मिली तो मैंने उन्हें उस बूढ़ी महिला का हवाला दिया तो उन्होंने बताया कि वह और छन्नू कभी एक ही उस्ताद से गायिकी सीखती थी ।
मालिनी अवस्थी ने श्रोताओं की मांग पर एक गजल और एक लोक गीत भी सुनाया और दर्शकों का दिल जीत लिया।
अरविंद कुमार की रिपोर्ट
Posted Date:February 3, 2026
10:22 pm