विश्व पुस्तक मेले में लेखिकाएँ छाई रहीं


स्त्री सशक्तिकरण के इस दौर में जीवन के हर क्षेत्र में स्त्रियाँ आगे बढ़ रही हैं।भला वे साहित्य की दुनिया में पीछे क्यों रहे।
महादेवी वर्मा सुभद्रा कुमारी चौहान शिवानी अमृता प्रीतम कृष्णा सोबती और मंन्नू भंडारी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लेखिकाएँ साहित्य की हर विधा में रच रही हैं। विश्व पुस्तक मेला में एंट्री फ्री होने से पुस्तक प्रेमियों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ तो लेखिकाओं और महिला पठकोँ की भागीदारी बढ़ी। मेले में इस बार बड़ी संख्या में लेखिकाएँ भी आईं और उनके कविता संग्रहों उपन्यासों कहांनी संग्रहों और आलोचना की किताबों का लोकार्पण हुआ। दलित लेखिका अनीता भारती की सावित्री बाई फुले पर महत्वपूर्ण किताब का विमोचन भी हुआ मेले में।
स्वराज प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक में सावित्री बाई फुले की कविताएं शामिल की गई हैं और हिंदी की कवयित्रियों द्वारा उन पर लिखी गयी कविताओं को भी शामिल किया गया।


साथ मे सावित्री बाई के कुछ लेख भी शामिल हैं। यह सावित्री बाई फुले को समग्र रूप में समझने के लिए अपने आप में अनोखी किताब है।
संन्यासी के पत्र नामक किताब का संपादन कथाकार नीला प्रसाद ने किया है।इसमें फादर कामिल बुल्के के पारिवारिक पत्र हैं।नीला प्रसाद के पिता दिनेश्वर प्रसाद हिंदी के आलोचक और बुल्के के सहयोगी रह चुके थे।
वरिष्ठ लेखिका मृदुला गर्ग और नासिरा शर्मा ने मेले में” लिखने की मेज नाम” से किताब का लोकार्पण किया।सूरजप्रकाश द्वारा संपादित इस पुस्तक में 125 लेखकों के लेख हैं जिनमें 57 लेखिकाएँ शामिल हैं।इससे भी सिद्ध होता है कि हिंदी में कितनी लेखिकाएँ हैं और आधी आबादी हिंदी साहित्य में सक्रिय हैं।

राजकमल के लेखक से मिलिए कार्यक्रम में अनामिका मनीषा कुलश्रेष्ठ, वंदना राग सुजाता , निधि अग्रवाल ,नेहा नरुका प्रज्ञा ,सँगीता मिश्र पाठकोँ से मुखातिब हुई और उन्होंने उंनसे संवाद किया। यह इस बात को दर्शाता है कि इन लेखिकाओं ने पाठकों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

राजपाल से मनीषा कुलश्रेष्ठ का नया उपन्यास “किनाया “ आया ।लेखिका ने इसे यात्रा संस्मरण और उपन्यास की मिली जुली विधा में लिखा गया बताया है। मनीषा का यह आठवां उपन्यास है। बलवंत कौर ने विभाजन को लेकर अपनी नई किताब स्मृति और दंश पर राजकमल के स्टाल पर संवाद किया। विभाजन के दर्द और कथा साहित्य को समझने के लिए यह महत्वपूर्ण किताब है।

कहांनी की किताबों में वरिष्ठ कथाकार कविता का सातवां कहांनी संग्रह “ वो रेन लिली खिलने के दिन “भी मेले में आया। इसे राजकमल ने छपा है।कविता लगातार कहानियां लिख रही हैं। राजकमल से ही जसिंता करकेंटा की भी कहानियों की पहली किताब “घर में पेड़”आई मेले में। जसिंता वर्षों से आदिवासी कविता की सशक्त आवाज हैं।अब कहांनी की दुनिया मे उतर आई हैं।

कथकार रूपा सिंह की आलोचना की किताब आधार प्रकाशन से आई।हरि भटनागर और लीलाधर मंडलोई ने विमोचन किया। हिंदी में स्त्री आलोचक कम हैं इस दृष्टि से इस किताब का स्वागत किया जाना चाहिए।
पत्रकार नरेश कौशिक का पहला कहांनी संग्रह “जिंदा रहाणे की जिद “राजपाल से आया। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता लेखिका और विदुषी सईदा हमीद ,वरिष्ठ टीवी पत्रकार कादम्बिनी शर्मा और जगमति सांगवान ने इसका लोकार्पण किया।

कविता की महत्वपूर्ण किताबों में शोभा सिंह ,रूपम मिश्र प्रिया वर्मा और अनामिका चक्रवर्ती की किताबों का लोकार्पण हुआ।
शोभा सिंह का कविता संग्रह गुलमोहर किताब से आई।

अनामिका चक्रवर्ती का संग्रह भावना ने छापा। राजेश कुमार और प्रियदर्शन ने लोकार्पण किया। रांची की सुषमा सिन्हा का कविता संग्रह प्रकाशन संस्थान से आया। अब्दुल विस्मिल्लाह लीलाधर मंडलोई और शंकर जी ने इसका लोकार्पण किया। प्रिया वर्मा की किताब का लोकार्पण अशौक वाजपेयी, लीलाधर मंडलोई और सविता सिंह ने किया। प्रलेक प्रकाशन ने इसे छापा है।

स्त्री दर्पण से जुड़ी रीता दास राम का नया काव्य संग्रह अर्थ बोध के सान्निध्य में सेतु प्रकाशन से आया। यह संग्रह मंगलेश डबराल को समर्पित है। स्त्री दर्पण से जुड़ी डॉक्टर सुनीता की दो किताबें आलोचना की मेले में आई। एक वनिका से और दूसरी सेतु से आई।

उर्दू शायरी में सन्जू शब्दिता का पहला ग़ज़ल संग्रह” साये से मुखातिब “राजपाल से आया।उसका लोकार्पण प्रभात रंजन और ओम निश्चल ने किया। स्वतंत्र प्रकाशन ने विभा रानी और स्वाति चौधरी की दो अनूठी पुस्तक लाइफ स्केच सिरीज़ में छापी है।मेले में वह आकर्षण का केंद्र थी।साहित्य अकादमी के समारोह में क्षमा शर्मा अनामिका ने अपने अनुभव सुनाए।
मेले में ममता कालिया , चित्र मुद्गल भी कार्यक्रमों में नज़र आई ।उन्होंनेकिताबों का लोकार्पण किया।नासिरा जी व्हील चेयर पर आईं।

इसके अलावा मेले में सुमन केसरी, गरिमा श्रीवास्तव, कल्पना मनोरमा, ज्योत्ति चावला, अंजू शर्मा, मृदुला शुक्ला, रश्मि भारद्वाज , स्मिता सिन्हा विजय श्री तनवीर, प्रियंका ओम, अणुशक्ति सिंह, वंदना गुप्ता, सिनीवाली, वंदना शेखर , वंदना वाजपेयी, नीलिमा शर्मा ,अनुप्रिया, भावना झा, शोभा अक्षर, भाषा सिंह जैसी लेखिकाओं की भी भागीदारी रही।

21 वीं सदी में स्त्री लेखन का जिस तरह विस्फोट हुआ है वह अभूतपूर्ण घटना है। गत 25 सालों में वे साहित्य के परिदृश्य पर छा गयी हैं। विश्व पुस्तक मेले में उनकी भागीदारी से भी यह बात सिद्ध हो रही है।

  • अरविंद कुमार
Posted Date:

January 20, 2026

11:48 pm

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