क्या आप कुदपोली के अनाम स्वतंत्रता सेनानियों को जानते हैं जिन्होंने 1857 से 21 साल पहले सशत्र विद्रोह किया था? 53 वें विश्व पुस्तक मेले में इस विद्रोह के बारे में पुस्तक के लोकार्पण से शुरू हुआ उद्घाटन समारोह के दौरान इन अनाम स्वतंत्रता सेनानियों का ज़िक्र हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘द सागा ऑफ कुदोपली: द अनसंग स्टोरी ऑफ 1857’ के अनूदित संस्करणों का विमोचन किया। यह पुस्तक बांग्ला, पंजाबी, असमिया, मलयालम, उर्दू, मराठी, तमिल, कन्नड़, तेलुगु और स्पेनिश सहित नौ भारतीय भाषाओं में प्रकाशित की गई है।
भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के एक गुमनाम अध्याय को उजागर करनेवाली किताब के लोकार्पण से आज़ादी के इतिहास से देश भर के लोग वाकिफ होंगे। ओडिशा के संबलपुर जिले के कुदोपली से वीर सुरेन्द्र साईं और स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के नेतृत्व में यह सशत्र विद्रोह हुआ था। संबलपुर के कुदोपली में यह विद्रोह क्षणिक प्रतिरोध नहीं था, बल्कि एक गुरिल्ला आंदोलन था, जो पीढ़ियों तक चला और सामूहिक स्मृति, स्थानीय नेतृत्व तथा असाधारण विद्रोही चेतना से प्रेरित रहा। दमन, गिरफ्तारियों और निर्वासन के बावजूद यह आंदोलन 1827 से 1862 तक औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध सबसे लंबे सशस्त्र विद्रोह के रूप में जारी रहा।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले इस दुर्लभ प्रतिरोध का उदाहरण प्रस्तुत करती ‘द सागा ऑफ कुदोपली: अनसंग स्टोरी ऑफ 1857’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन भूले-बिसरे नायकों को सामने लाती है, जिनकी कहानियाँ समय के साथ ओझल हो गई थीं।
समारोह को संबोधित करते हुए धर्मेंन्द्र प्रधान ने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा विश्व पुस्तक मेला 2026 केवल विचारों का संगम ही नहीं है, बल्कि यह भारत की सशक्त और जीवंत पठन संस्कृति का एक भव्य उत्सव भी है। पुस्तक मेले की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास : शौर्य एवं प्रज्ञा@ 75’ है। क़तर और स्पेन जैसे देशों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए माननीय शिक्षा मंत्री ने इसे सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन के महत्व को और बढ़ाने वाला कहा। उन्होंने कहा कि संबलपुर की धरती पर स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम अध्याय को उजागर करने वाली पुस्तक ‘द सागा ऑफ कुदोपली: द अनसंग स्टोरी ऑफ 1857’ को बांग्ला, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम और उर्दू सहित 9 भारतीय भाषाओं तथा एक अंतरराष्ट्रीय भाषा स्पेनिश में प्रकाशित किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पहले ही हिंदी, अंग्रेज़ी और ओड़िया में प्रकाशित की जा चुकी है और अब कुल 13 भाषाओं में उपलब्ध है।
उन्होंने इस पुस्तक को वीर सुरेन्द्र साईं जी की विरासत और कुदोपली के शहीदों के बलिदान को सम्मान देने का एक सराहनीय प्रयास बताया।
स्पेन के माननीय संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्तासुन डोमेनेक ने स्पेन-भारत द्विवार्षिक वर्ष 2026 के दौरान स्पेन की भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मेला भारत में स्पेनिश लेखकों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जहाँ स्पेनिश भाषा और साहित्य में रुचि निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने जुआन रामोन हिमेनेज़ और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच ऐतिहासिक साहित्यिक संबंधों को भी याद किया।
कतर के माननीय संस्कृति मंत्री महामहिम अब्दुलरहमान बिन हमद बिन जासिम बिन हमद अल थानी ने कहा कि कतर की भागीदारी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को दर्शाती है तथा संस्कृति और ज्ञान को जन-से-जन संपर्क और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला के रूप में पुनः स्थापित करती हैl इस मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक प्रकाशक भाग ले रहे हैं, 600 से अधिक कार्यक्रमों में, 1,000 से अधिक वक्ता शामिल हैं तथा 20 लाख से अधिक आगंतुकों के आने की अपेक्षा है।
इस अवसर पर कतर के भारत में माननीय राजदूत महामहिम मोहम्मद हसन जबिर अल जबिर, कतर राज्य के माननीय संस्कृति मंत्री महामहिम अब्दुलरहमान बिन हमद बिन जासिम बिन हमद अल थानी, स्पेन के माननीय संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्तासुन डोमेनेक के अलावा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास-भारत के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, स्पेन के संस्कृति मंत्रालय में डायरेक्टर जनरल ऑफ बुक्स, कॉमिक्स एंड रीडिंग सुश्री मारिया जोसे गाल्वेज, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी, आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक नीरज खरवाल, आईएएस, आईटीपीओ के कार्यकारी निदेशक प्रेमजीत लाल, आईटीएस, तथा एनबीटी के निदेशक एवं नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के सीईओ युवराज मलिक सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। स्वागत भाषण एनबीटी-के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने दिया जबकि एनबीटी, के निदेशक युवराज मलिक ने भी सम्बोधित किया।
शिक्षा मंत्री ने कतर और स्पेन के संस्कृति मंत्रियों के साथ ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा@75’ थीम पवेलियन तथा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती और ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित दो विशेष प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन हॉल नंबर पांच में किया।
गणमान्य अतिथियों ने अंतरराष्ट्रीय पवेलियन, सम्मानित अतिथि देश पवेलियन (कतर), फोकस देश पवेलियन (स्पेन) और बाल मंडपम का भी भ्रमण किया। थीम पवेलियन 1,000 वर्ग मीटर में फैला एक 360-डिग्री इमर्सिव एक्सपीरियंस प्रस्तुत करता है, जिसमें 500 से अधिक पुस्तकें, सुसज्जित प्रदर्शनियाँ, वृत्तचित्र और इंस्टॉलेशन शामिल हैं। इनमें अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की प्रतिकृतियाँ, 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि तथा बडगांव1947 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक प्रमुख सैन्य अभियानों पर सत्र शामिल हैं। यहॉन 100 से अधिक थीम-आधारित कार्यक्रमों भी होने हैं। कतर (सम्मानित देश) और स्पेन (फोकस देश) के अलावा, मेले में रूस, जापान, फ्रांस, पोलैंड, ईरान, कजाखस्तान, हंगरी और चिली सहित 35 से अधिक देशों के प्रकाशक और सांस्कृतिक संस्थान भाग ले रहे हैं। साथ ही, 10 अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेलों के निदेशकों की पहली बार भागीदारी भी हो रही है।
बाल मंडपम -किड्ज़ एक्सप्रेस के माध्यम से नवोदित पाठकों के लिए रोचक गतिविधियाँ प्रस्तुत की जा रही हैं, जबकि राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय 6,000 से अधिक निःशुल्क ई-पुस्तकों तक पहुँच प्रदान कर विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों में समावेशी पठन को बढ़ावा दे रहा है। विश्व पुस्तक मेले में इस बार 35 से ज्यादा देश और एक हजार से ज्यादा प्रकाशक हिस्सा ले रहे हैं।
— अरविंद कुमार की रिपोर्ट
Posted Date:January 11, 2026
5:26 pm