जन सरोकारों के कथा शिल्पी थे से रा यात्री: कथा संवाद

गाजियाबाद में साहित्य की परंपरा को एक अहम मुकाम तक पहुंचाने वाले कथा शिल्पी से रा यात्री की कथा यात्रा के कई पड़ाव रहे। उनकी कहानियों में समाज और सियासत के साथ रिश्तों के इतने शेड्स मिलते हैं कि आज भी इस कथाकार की रचनाशीलता और दृष्टि की गहराई को समझ पाना आसान नहीं है। जीवन के आखिरी दिनों तक से रा यात्री जनतांत्रिक मूल्यों की बात करते रहे, सरकार और व्यवस्था के संवेदनहीन रवैये को लेकर आंदोलित होते रहे और न लिख पाने की बेचैनी के बावजूद अपनी आंखों में और अपनी चेतना में कहानियों के कई प्लॉट्स बुनते रहे। बात करते तो दूर तक निकल जाते जहां एक खूबसूरत हिन्दुस्तान का सपना होता। ऐसे कथा शिल्पी को गाजियाबाद कभी भूल नहीं सकता। उनकी यायावरी, उनका फक्कड़पन और लिखने की उनकी जिजिविषा तमाम साहित्यप्रेमियों के दिलोदिमाग में हमेशा रहेगी।

से रा यात्री की जयंती पर आयोजित ‘कथा संवाद’ की अध्यक्षता इस बार वरिष्ठ आलोचक डॉ. राकेश कुमार ने की। उन्होंने कहा कि यात्री जी की कहानियां हर दौर में प्रासंगिक रहेंगी। वरिष्ठ लेखक मलिक राजकुमार ने कहा कि यात्री जी की भूमि पर कथा रंग की कार्यशाला रचनात्मकता के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। चर्चित लेखिका प्रज्ञा रोहिणी का कहना था कि रचना विरोधी समय में सृजन हमेशा ही एक बड़ी चुनौती रहा है। उन्होंने कहा कि कहानी में सहजता उसका सशक्त पक्ष होता है। यात्री जी का लेखन सहजता की मिसाल है।
कार्यक्रम का पहला हिस्सा यात्री जी के संस्मरणों के नाम रहा। से. रा. यात्री के लेखन और व्यक्तित्व पर चर्चा के दौरान उनकी मानस पुत्री व सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. माला कपूर ‘गौहर’ ने कहा कि यात्री जी ने जिस सहजता और शालीनता से जीवन जिया वह उनके लेखन में साफ
झलकता है। उन्होंने कहा कि बाबूजी (यात्री जी) का सानिध्य पूरे परिवेश को ही रचनात्मक बना देता था। वरिष्ठ रचनाकार कमलेश भट्ट ‘कमल’ ने कहा कि गाजियाबाद प्रवास के दौरान उन्हें यात्री जी की रचनात्मकता के विविध आयाम देखने को मिले। वरिष्ठ व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने कहा कि यह शहर कविता के लिए जाना जाता है। कहानी के लिए इस शहर को पहचाने जाने की शुरूआत यात्री जी से हुई। उन्होंने कहा कि जहां जहां भी हिंदी है, जहां जहां भी कहानी है, वहां वहां यात्री जी भी पहुंचे और उनके साथ साथ यह शहर भी वहां तक पहुंचा है।
प्रसिद्ध शायर सुरेन्द्र सिंघल ने कहा कि यात्री जी लेखन की हर विधा में अपनी दक्षता के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को यात्री जी की छत्र-छाया में रहने का अवसर मिला वह इस बात के साक्षी हैं कि लेखक का व्यक्तित्व और कृतित्व साथ-साथ चलता है। झूठे व्यक्तिव्त से शब्दों में वह आंच पैदा नहीं की जा सकती जिसका समाज अनुकरण करता है। वरिष्ठ लेखक योगेन्द्र दत्त शर्मा ने कहा कि यात्री जी के साथ उनका पीढ़ियों का रिश्ता है, जो निरंतर प्रगाढ़ होता जा रहा है। पत्रकार व लेखक अतुल सिन्हा ने कहा कि वह उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जिन्हें यात्री जी का सानिध्य उनके जीवन के अंतिम दशक में मिला। उन्होंने कहा कि उस दौरान यात्री जी सृजन से भले ही दूर थे, लेकिन समकालीन लेखन के प्रति पूरी तरह चेतन और जागरूक थे। उन्होंने कहा कि एक दशक से अधिक का समय शैय्या पर बिताते हुए भी यात्री जी पठन-पाठन के प्रति सजग थे। देश दुनिया के तमाम सरोकार उनके विमर्श में शामिल रहते थे। सुप्रसिद्ध शायर दीक्षित दनकौरी ने कहा कि यात्री जी व्यक्तिगत जीवन में जितने सच्चे, खरे और बेबाक थे, उनकी यही खूबी उनके लेखन में भी विद्यमान है। सुप्रसिद्ध रंगकर्मी अनिल शर्मा ने उन्हें हिंदी कहानी का युग पुरुष बताया।


कार्यक्रम का दूसरा भाग ‘कथा संवाद’ अपनी परंपरा के अनुसार कहानियों पर खुली चर्चा का रहा। जिसमें डॉ. बीना शर्मा ने ‘भाईचारा’, रश्मि वर्मा ने ‘मुझे आसमान चाहिए’ और शकील अहमद ने ‘नई सोच’ का पाठ किया। शिवराज सिंह की कहानी ‘भाव’ का पाठ वागीश शर्मा व विपिन जैन की कहानी ‘मेरा आसमान’ का पाठ डॉ. स्वाति चौधरी ने किया। पढ़ी गई कहानियों की खूबियों और कमियों पर विमर्श में श्रोताओं द्वारा शिल्प, कहन, तार्किकता पर गहन विचार के साथ नवीन संभावनाओं को खोजा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मलिक राजकुमार ने रचना को प्रासंगिकता से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कहानियों में हमारा समय दर्ज होना जरूरी है, क्योंकि यह हमारे समय का आईना है। कार्यक्रम की अति विशिष्ट अतिथि प्रज्ञा रोहिणी ने कहा कि 21वीं सदी का यह समय रचनात्मकता के विस्फोट का समय है। लेकिन रचनात्मकता आलोचना के दायरे में कितना ठहरेगी और कहां इतिहास की छलनी से निकल जाएगी, यह देखना अभी शेष है। उन्होंने कहा कि जहां अभिव्यक्ति लगातार संकटों से गुजर रही हो, वहां अभिव्यक्त कर पाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रचना विरोधी समय में लेखन जोखिम का काम है और यह अच्छा संकेत है कि आप जोखिम उठा रहे हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि राजधानी को छोड़ गाजियाबाद रचनात्मकता का नया केंद्र बन रहा है, यह लेखन के भविष्य के प्रति आश्वस्त करता है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि ‘कथा रंग’ के आयोजन यात्री जी की परंपरा और विरासत को निरंतर समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘कथा संवाद’ की यात्रा अनवरत चलती रहेगी। कार्यक्रम का संचालन आलोक यात्री एवं डॉ. वीना शर्मा ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर आलोक अविरल, वंदना वाजपेई, डॉ. अजय गोयल, सिनीवाली, अशोक मिश्रा, अशोक गुप्ता, पंडित सत्य नारायण शर्मा, सुभाष अखिल, नेहा वैद, रवि पाराशर, डॉ. वीना मित्तल, संदीप वैश्य, इंद्र कुमार, प्रवीण त्रिपाठी, अंजू जैन, डॉ. गुडिया बानो, सुधा गोयल, देवेंद्र देव, प्रेम किशोर शर्मा, संदीप तोमर, डॉ. ईश्वर सिंह तेवतिया, प्रभात चौधरी, मौनी गोपाल तपिश, अवधेश सिंह, अनिमेष शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, विनय विक्रम सिंह, सुमित्रा शर्मा, संजय दत्त शर्मा, राष्ट्र वर्धन अरोड़ा, ओंकार सिंह, देवेंद्र गर्ग, तन्मय यात्री, अभिनव यात्री, अविनाश, निरंजन शर्मा, डी. डी. पचौरी, दीपक श्रीवास्तव ‘नीलपदम’, डॉ. अल्पना सुहासिनी, गार्गी कौशिक, विश्वेंद्र गोयल, हेमलता गोयल,
प्रताप सिंह, अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव, मंजू मलिक, रिंकल शर्मा, संजीव शर्मा, प्रमोद शिशोदिया, अजय कुमार गुप्ता, अरुण कुमार गुप्ता, तिलक राज अरोड़ा, हेमेंद्र बंसल, विष्णु कुमार गुप्ता, सुरेश वर्मा, डॉ. सुमन गोयल, स्वामी अशोक चैतन्य, तेजवीर सिंह, उत्कर्ष गर्ग, विनय सिंह राठौर, संजय भदौरिया एवं प्रियंका शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्य अनुरागी मौजूद थे।

Posted Date:

July 14, 2025

8:54 pm Tags: , , , ,

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