
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व निदेशक और “कहानी के रंगमंच” के प्रणेता देवेंद्र राज अंकुर ने कहा है कि भरत मुनि के” नाट्यशास्त्र” पर जब भी चर्चा हुई है उसमें वर्णित अभिनय पक्ष पर चर्चा बहुत कम हुई है जबकि भरत मुनि के उस ग्रन्थ में सर्वाधिक जिक्र अभिनय का ही किया गया है। भारंगम के श्रुति कार्यक्रम में देवेन्द्र राज अंकुर ने ये बात कही। उनकी लिखी पुस्तक 'भरत मुनि के नाट्यशास्त्र
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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पत्रिका “रंग प्रसंग” के 59वें अंक के लोकार्पण के दौरान वक्ताओं ने सांस्कृतिक पत्रकारिता के तमाम पहलुओं पर चर्चा की और आज के दौर में इसे हाशिए पर पहुंच जाने के संकट पर भी बात की। भारंगम के ’श्रुति ‘ कार्यक्रम में “रंग प्रसंग” के पूर्व संपादक और प्रसिद्ध कवि तथा कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल, एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, पत्रिका की अतिथि संपादक शशि प्
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प्रसिद्ध रंग समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी ने कहा है कि हमेशा से रंगमंच का संकट मौजूद रहा है, यहां तक कि भरत मुनि के काल में भी और नाटक करने वालों के भीतर भी एक नाटक होता रहता है। उनका कहना है कि यह सच है कि एनएसडी से इब्राहिम अल्का जी के ज़माने में एक से एक दिग्गज कलाकार सामने आए पर हिंदी रंगमंच का कभी कोई स्वर्णकाल नहीं रहा और स्वर्ण काल की अवधारणा भी एक तरह का भ्रम है लेकिन उन्होंने इस बा
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आंद्रे बेते नहीं रहे। हिंदी मीडिया के लिए भले ये खबर हो या ना हो या कोई छोटी मामूली सी खबर हो लेकिन एकेडमिक वर्ल्ड में आंद्रे बेते का नहीं रहना एक बहुत बड़ी खबर है और इस बात को दीपांकर गुप्ता ,वीणा दास, अभिजीत पाठक और आनंद कुमार जैसे प्रख्यात समाज शास्त्री समझ सकते हैं जो अभी सक्रिय हैं। भले ही हमारे टीवी एंकरों को न पता हो कि आंद्रे बेते , . कौन थे या यूट्यूबरो को ना पता हो आंद्रे बेते कौ
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हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार एवम संपादक हरि भटनागर को रूस का मिख़अईल शोलअख़फ़ सम्मान देने की घोषणा की गई है। भारत मित्र समाज, मसक्वा द्वारा भारतीय कथाकारों के लिए विशेष रूप से स्थापित यह सम्मान प्रतिवर्ष किसी एक कथाकार को दिया जाएगा। वर्ष 2026 के लिए यह प्रथम वार्षिक सम्मान हरि भटनागर को देने का निर्णय लिया गया है।
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बीते जमाने की मशहूर शास्त्रीय गायिका असगरी भाई ने मालिनी अवस्थी को एक बार पान का बीड़ा देते हुए कहा कहा कि पान खाते समय तीन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए।पहली बात तो यह कि किसी भी व्यक्ति का दिया पान नहीं खाना चाहिए और खाने से पहले सबसे पहले उसे खोलकर देख लेना चाहिए कहीं उसमें कुछ मिलाया तो नहीं गया है। पद्मश्री से सम्मानित लोग गायिका मालिनी अवस्थी ने भारंगम के श्रुति प्रोग्राम मे
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अमेरिका के न्यूयॉर्क में जन्मी स्टैला अगर आज जीवित होती तो वह 126 वर्ष की होती। वे दुनिया की जानी-मानी रंगकर्मी और रंग चिंतक मानी जाती हैं । उनकी एक मशहूर किताब " द आर्ट ऑफ एक्टिंग "रंगकर्म की दुनिया में मील का पत्थर मानी जाती है और सभी रंगकर्मी अपने जीवन में एक बार जरूर इस पुस्तक को पढ़ना चाहते हैं । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कार्यवाहक निदेशक एवं रंग मंडल के प्रमुख रह चुके प्रसिद्ध
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