
हिंदुस्तान की 'सुर कोकिला' लता मंगेशकर की आवाज़ को मुकम्मल बनाने और उन्हें शिखर तक पहुंचाने में मुस्लिम शख्सियतों का बहुत बड़ा योगदान है। ऐसी शख्सियतों में बड़े गुलाम अली खां, मास्टर गुलाम हैदर, महबूब खान, जां निसार अख़्तर, दिलीप कुमार, राजा मेंहदी अली खां, कैफ़ी आज़मी, नौशाद, साहिर लुधियानवी, शकील बदायूंनी, हसरत जयपुरी, खुम़ार बाराबंकवी, नक्श लायलपुरी, कैफ़ भोपाली से लेकर फारु़ख क
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“लिखत पोएटिका – क” (प्रकाशक - पाखी रे क्रियेटिव्स, जयपुर) नाम से आई इस पुस्तक में 95 रचनाकारों की एक-एक रचना शामिल है। इनमें चर्चित नाम भी हैं और नवोदित भी। संग्रह के शुरू में इरशाद कामिल और तस्वीर कामिल के संबोधन (“कविता के नाम” और “आपको इकबाल मुबारक”) भी हैं। “कविता के नाम” और “आपको इकबाल मुबारक” के लिए इतना ही कहा जा सकता है कि अगर आप किसी बेमिसाल उपन्यास या कहानी को पढ़ने के बाद ल
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नेपाल के ताज़ा हालात और लगातार अराजक होते जन विद्रोह के पीछे की वजहें क्या क्या हैं, इसपर विश्लेषण तो होने लगे हैं, लेकिन नेपाल को बेहद गहराई से समझने वाले और तीसरी दुनिया के देशों के जनांदोलनों की गहन पड़ताल करने वाले वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, संपादक आनंद स्वरूप वर्मा का विश्लेषण खास मायने रखता है। नेपाल की घटनाओं ने आनंद स्वरूप वर्मा को भीतर तक झकझोर दिया है और वह बीमार होने के बावजूद
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‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के तीसरे संस्करण का आयोजन इस बार पटना में 25 से 28 सितंबर 2025 के बीच सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में होगा। इस उत्सव का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं साहित्य अकादेमी द्वारा संयुक्त रूप से बिहार सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। यह जानकारी आज इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित प्रेस सम्मेलन में संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक
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नब्बे के दशक के बेहद संवेदनशील कवि मोहन राणा की। कविता का शीर्षक है घर। कई बरसों के बाद मोहन राणा पिछले दिनों भारत आए। रहते वो इंग्लैंड में हैं। वहीं का एक शहर है - बाथ जहां मोहन राणा रहते हैं। अब तो ब्रिटेन के नागरिक भी हो गए हैं। दिल्ली में जन्में, पले बढ़े और पढ़े। जब दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ते थे तो कला, साहित्य और खासकर कविता में दिलचस्पी हुई। जनसत्ता और नवभारत टाइम्स जैसे अख
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