
ग़ाजियाबाद में साहित्य की नई धारा बहने लगी है, कवियों और शायरों ने यहां समां बांध रखा है। चाहे कथा संवाद हो या बारादरी, कहानी और शायरी के नए रंग फूटने लगे हैं। कई वरिष्ठ तो कई नए रचनाकारों की सक्रियता ने यहां शब्दों और भावनाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है। इस बार की बारादरी में मशहूर शायर और कार्यक्रम के अध्यक्ष मोईन शादाब ने कहा कि गंगा जमुनी तहजीब की महफ़िल 'बारादरी'
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17 जुलाई को जब गंगा की लहरों पर सूर्य की अंतिम किरणें झिलमिला रही थीं, वाराणसी की वह शाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। नागरी प्रचारिणी सभा के आर्यभाषा पुस्तकालय परिसर में वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की बहुचर्चित पुस्तक ‘जर्नलिज्म AI’ के लोकार्पण के दौरान आज के दौर की पत्रकारिता और तकनीकी क्रांति के नए आयामों के तमाम अनछुए, अनकहे पन्ने खुल गए। अपने ज़माने के मशहूर पत्रकार, संपादक, चि
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गुरुदत्त ने जो फिल्में कीं, जिन कहानियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ परदे पर उतारा, जिन पात्रों को जिया और दुनिया की जिन सच्चाइयों को सामने ले कर आए, वह अपने आप में किसी अंतहीन मिसाल से कम नहीं.... उनके पूरे कामकाज पर , किरदारों पर, फिल्मों के विस्तृत फलक पर जाने माने लेखक और क्लासिक फिल्मों को गहराई तक समझने, परखने वाले प्रताप सिंह ने अपनी किताब सिनेमा का जादुई सफ़र में बहुत विस्तार से ल
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गाजियाबाद में साहित्य की परंपरा को एक अहम मुकाम तक पहुंचाने वाले कथा शिल्पी से रा यात्री की कथा यात्रा के कई पड़ाव रहे। उनकी कहानियों में समाज और सियासत के साथ रिश्तों के इतने शेड्स मिलते हैं कि आज भी इस कथाकार की रचनाशीलता और दृष्टि की गहराई को समझ पाना आसान नहीं है। जीवन के आखिरी दिनों तक से रा यात्री जनतांत्रिक मूल्यों की बात करते रहे, सरकार और व्यवस्था के संवेदनहीन रवैये को लेक
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