
साहित्य में विवाद अक्सर होते रहे हैं। चाहे लेखन पर, चाहे तथ्यों को पेश करने पर, चाहे भाषा पर या बड़े लेखकों की ज़िंदगी से जुड़ी सच्चाइयों पर। कथा सम्राट प्रेमचंद की ज़िंदगी, उनके लेखन, उनकी सादगी, उनके दर्शन या पत्रकारिता को लेकर बहुत कुछ लिखा, पढ़ा और बोला जाता रहा है। उनका तकरीबन सारा साहित्य उपलब्ध भी है और उनके उपन्यास, कहानियां और लेखन आज भी सबसे ज्यादा पढ़ा भी जाता है और उसपर चर्
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एक युवा छायाकार अगर अपने कैमरे में आम जनता की जीवन शैली, अपने देश की परंपराएं और मनोभावों को कैद करता है, उनकी बारीकियों को पकड़ता है तो बेशक उसकी दृष्टि आने वाले दिनों में उसे एक बड़े छायाकार की संभावना जगाती है। दिल्ली में युवा फोटोग्राफर नितिन गुप्ता की फोटो प्रदर्शनी में ऐसी ही संभावनाओं से भरे चित्र देखे जा सकते हैं... विमल कुमार की एक रिपोर्ट
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