
हम जब भी लघु पत्रिकाओं पर विचार करते हैं तो वर्तमान में मीडिया और पत्रकारिता की भूमिका हमारे सामने होती है। यह बताने की जरूरत नहीं है कि हमारे यहां पत्रकारिता का विकास राष्ट्रीय आंदोलन के साथ हुआ। उसके सामने देश को आजाद कराने का लक्ष्य था। साहित्यकारों ने पत्रकारिता को आगे बढ़ाने और उसे जनमाध्यम बनाने का काम किया।
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हिंडाल्को, रेनूकूट के मजदूर नेता रामदेव सिंह 14 वर्षों तक कंपनी से बाहर बेरोजगार रहकर हिंडाल्को मैनेजमेंट से मजदूरों के हक के लिए लड़ते रहे। मुफलिसी में रहे पर झुके नहीं, टूटे नहीं। ललकारते रहे। चुनौती देते रहे। एशिया की सबसे बड़ी एल्यूमिनियम कंपनी हिंडाल्को की साजिस, चालबाजी और जानलेवा हमलों से बचने के लिये विंध्य पर्वत की गोद में बसे मिर्जापुर (सोनभद्र) में अपने ठिकाने बदलते रहे।
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गाजियाबाद में धीरे धीरे महफ़िल-ए-बारादरी का रंग जमने लगा है। कुछ ही महीनों में तमाम शायरों के लिए इस मंच ने अपनी खास जगह बना ली है। अब इस बार यानी मई की महफ़िल-ए-बारादरी की बात करें तो इसमें आपसी प्रेम और सदभाव के साथ संवेदनाओं से भरी पंक्तियों के कई रंग बिखरे। ज्यादातर शायरों और कवियों ने प्रेम जैसे शाश्वत सत्य और इंसानियत को अपनी पंक्तियों में बेहद भावपूर्ण अंदाज़ में पिरोया।
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