
महफ़िल-ए-बारादरी की अध्यक्षता करते हुए मशहूर शायर मंगल नसीम ने कहा कि उन्होंने पूरी दुनिया के मंचों से शेर पढ़े, लेकिन इस बिरादरी में आकर ऐसा महसूस हो रहा है मानों घर वापसी हो गई है। हर शेर पर दाद बटोरते हुए उन्होंने फरमाया "मुझे वो गैर भी क्यूं कह रहे हैं, भला क्या ये भी अपनापन नहीं है। किसी के मन को भी दिखला सके जो, कहीं ऐसा कोई दर्पण नहीं है। मैं अपने दोस्तों के सदके लेकिन, मेरा कातिल क
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जन संस्कृति मंच (जसम) उत्तर प्रदेश का आठवां राज्य सम्मेलन बांदा में 2 और 3 अक्टूबर को संपन्न हुआ। इसका उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति ने कहा कि रचनाशीलता के लिए कल्पनाशीलता बहुत जरूरी है लेकिन आज हालात यह है कि हकीकत कल्पना से आगे है। हम सोच नहीं सकते, वैसे हालात हैं। स्थितियां विकट है।
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