
जिनके जीवन में रंग नहीं हैं, वृंदावन की गलियां उन्हें भी रंगीन बना देेती हैं... विधवाओं के लिए समाज में जो परंपरागत सोच है, वृंदावन उसे खारिज करता है। कहते हैं कि देश में ये इकलौती ऐसी जगह है जहां समय-असमय सफ़ेद कपड़ों में लिपट जाने वाली महिलाओं के जीवन में यहां रंग भर जाते हैं। कृष्ण भक्ति में रमी और राधे राधे करती ये महिलाएं यहां ज़िंदगी के मायने तलाशती हैं, कुछ नए रंगों को अपने जीवन
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रंगकर्म संस्कृति का वो अहम हिस्सा है जो किसी न किसी रूप में आम आदमी से जुड़ता है - दिल्ली समेत देश के 17 शहरों में आयोजित हो रहे थिएटर ओलम्पिक की मूल आत्मा यही है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक और थिएटर ओलंपिक को पहली बार अपने देश में करवाने वाले मशहूर रंगकर्मी वामन केन्द्रे इसे एक ऐसी ही उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि थिएटर को मौजूदा वक्त में आम लोगों से जोड़ने, उसे एक नई ताक
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ब्रज की होली के कई रंग हैं। ब्रज की होली की छटा अलग है, कहते हैं कि जग में होली ब्रज में होला.. बाकी ज्यादातर जगहों पर जहां होली एक दिन खेली जाती है, वहीं मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव, बरसाने में कुल एक हफ्ते तक होली चलती है। कान्हा के गांव नंदगांव और ब्रज की गलियों में घूमते और अपने कैमरे में होली के तमाम रंग कैद करते वरिष्ठ फोटोग्राफर रवि बत्रा ने जो रंग 7 रंग के लिए भेजा, वो आप भी देखिए.
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दुबई जाने से पहले और शादी में शामिल होने की सबसे ताज़ा तस्वीरें... श्रीदेवी देर रात तक पूरी ज़िंदादिली के साथ हंसती मुस्कराती रहीं... लेकिन चंद ही घंटों बाद सबको हमेशा के लिए अलविदा कह गईं....
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श्रीदेवी का जाना एक ऐसे दुखद सपने जैसा है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। बचपन से हमसब ने श्रीदेवी की खूबसूरती, उनकी अदाकारी के तमाम शेड्स, उनका अल्हड़पन और उनकी आंखों में नागिन वाला गुस्सा सिल्वर स्क्रीन पर देखा है। उनकी नृत्य शैलियां, उनका गुस्सा, उनका प्यार, उनका अपनापन और वो सबकुछ जो उन्हें एक संपूर्ण अदाकार, एक बेहतरीन इंसान, एक आदर्श मां, एक शानदार व्यक्तित्व बनाता था...
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बनारस का अपना ही रस है। बनारस के गंगा तटों की अपनी संस्कृति है। मौज मस्ती और बिंदास जीवन शैली के अद्भुत नज़ारे आपको बनारस के सभी घाटों पर मिल जाएंगे। क्रिकेट खेलने के लिए यहां बच्चों को किसी मैदान या स्टेडियम की ज़रूरत नहीं - गंगा मइया के किनारे इसका जो मज़ा है, वो तो यहां खेलने वालों को ही पता है।
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325 स्टॉल्स, करीब एक हजार कलाकार। कला, नृत्य, संगीत और रंगकर्म का बेहद खूबसूरत संगम...इन बेहतरीन यादों के साथ पहला अंतर्राष्ट्रीय कला मेला खत्म हो गया। इस मेले में यूरोप, पैन एशिया और अफ्रीका से आए कलाकारों ने अपने देश की कला और संस्कृति से जुड़ी बेजोड़ प्रस्तुतियां दीं। इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित 15 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में एक ला
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अंतर्राष्ट्रीय कला मेला इतने बड़े पैमाने पर पहली बार हो रहा है। लेकिन इतनी कोशिशों के बावजूद मेले में मीडिया और आम लोगों की दिलचस्पी कम होने की वजह से यहां आए कलाकारों में कुछ मायूसी का भाव नज़र आ रहा है। तमाम कलाकार ये कहते नज़र आ रहे हैं कि अभी तक उनके स्टॉल का खर्च तक नहीं निकल पाया है, लेकिन उम्मीद है 18 फरवरी तक स्थितियां बदलेंगी।
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साहित्य अकादमी के वार्षिक समारोह साहित्योत्सव का 12 फरवरी से आगाज हो गया। छह दिवसीय इस आयोजन के पहले दिन साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेताओं को अवॉर्ड दिए गए। हिंदी के रमेश कुंतल मेघ समेत 24 लोगों को अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। साहित्य प्रेमियों को उनसे रूबरू होने और सवाल पूछने का मौका भी मिला।
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