
संस्कृति मंत्रालय ने देश भर के कोने कोने में फैले कलाकारों की जानकारी इकट्ठा करने के साथ साथ लोक और आदिवासी कलाकारों का डाटाबैंक तैयार करने का काम तेज़ कर दिया है। इस काम के लिए मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई है जो ब्लाक स्तर पर जाकर कलाकारों की जानकारी इकट्ठा करेगी। इसकी शुरूआत 17 और 18 जून को मथुरा के गोवर्धन से शुरू होगी। इसके तहत आसपास के करीब 100 गांवों के कलाकारों की सूची तैयार की जाएगी
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अपनी किताबों के ज़रिये मौजूदा समाज की असलियत तलाशती नीलिमा डालमिया आधार की नई किताब ‘द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा’ मौजूदा समाज में किसी के ‘महान’ बनने की प्रक्रिया और पुरुषवादी सोच का बारीकी से विश्लेषण करती है। गांधी को ‘गांधी’ बनाने में कस्तूरबा ने अपना क्या क्या खोया होगा, किन इम्तिहानों से गुज़री होंगी, खुद को कैसे परदे के पीछे रखकर एक ‘पतिव्रता’ और ‘आदर्श पारंपरिक’ पत्नी का
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एक कलाकार की दृष्टि और उसकी कल्पनाशक्ति का अंदाज़ा आप उसकी कलाकृतियों से लगा सकते हैं। उसके रंगों की एक भाषा होती है और जब उसकी कला मानवीय संवेदनाओं से जुड़ती है तो एक अलग ही दुनिया बनती है। अपनी कल्पनाओं को कैनवस पर उतार कर जिस तरह रंजीता कांत ने इस भीड़ में भी अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है, वह कम महिलाएं कर पाती हैं। रंजीता कांत की कला यात्रा के कई पड़ाव हैं – दिल्ली से लेकर केरल त
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