साधारण से असाधारण होने की कहानी हैं तीजन बाई…
  • विनोद वर्मा

यूरोपीय धरती से निकले ओपेरा, बैले, सिम्फ़नी और फ़्लेमिंको विशुद्ध शास्त्रीय हैं. पर बेहद लोकप्रिय हैं. और इनमें से कुछ भी देख रहे हों तो दर्शक सहज रूप से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, अक्सर भावुक हो जाते हैं और आत्मविभोरता में रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ठीक वही अनुभव होता है जब आप तीजन बाई से पंडवानी सुनते हैं. पंडवानी यानी महाभारत के अलग अलग प्रसंगों की संगीतमय प्रस्तुति. एकल नाट्य की तरह.

जिन्होंने अब तक तीजन बाई से आमने सामने बैठकर पंडवानी नहीं सुनी है वो नहीं समझ सकते कि इसका मतलब क्या है. जिन्होंने फ़िल्मों के अलावा ओपेरा, बैले, सिम्फ़नी और फ्लेमिंको का अनुभव नहीं किया है वे इस तुलना को भी नहीं समझ सकते.

तीजन बाई छत्तीसगढ़ की धरती से निकलती हैं और पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. बावजूद इसके कि लोग छत्तीसगढ़ी नहीं जानते लेकिन वे इस अनजान भाषा में गढ़े जा रहे आख्यान को ठीक तरह से समझते हैं. तीजन बाई के हाथ में रखा रंगबिरंगा तंबूरा (या तानपुरा) कभी अर्जुन के रथ में लगा ध्वज बन जाता है, कभी भीम की गदा तो कभी द्रोपदी के रौद्र रूप में उसके हाथ का कोई अदृश्य हथियार. वह दु:शासन के प्रहसन में अलग पात्र की तरह होता है तो दुर्योधन का ज़िक्र आते ही भूमिका बदल लेता है. तीजन बाई दहाड़ रही होती हैं और एकाएक इतनी मुलायमियत के साथ गाने लगती हैं कि सहज विश्वास नहीं होता. जब तीजन बाई मंच पर होती हैं तो भाषा गौण हो जाती है. भावभंगिमा या प्रहसन हावी हो जाता है. कभी कोई शिकायत नहीं करता कि जो तीजन बाई ने कहा वह समझ में नहीं आया.

तीजन बाई साधारण से असाधारण हो जाने की कहानी है. महिला होकर भी कापालिक शैली में पंडवानी करती हुईं वे विद्रोह की भी प्रतिनिधि हो जाती हैं और दुनिया भर में घूम-घूमकर पंडवानी गाने के बाद, अनगिनत पुरस्कारों और सम्मानों के बाद, लौटकर वे एक सरल साधारण छत्तीसगढ़ी स्त्री भी हो जाती हैं.

आज उनका जन्मदिन है. वे दीर्घायु हों, स्वस्थ रहें और हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए भी पंडवानी गाती रहें. शुभकामनाएं.

(विनोद वर्मा जाने माने पत्रकार हैं.. बीबीसी, अमर उजाला समेत कई बड़े संस्थानों में अहम पदों पर काम कर चुके हैं… सियासत के साथ साथ कला, संस्कृति में भी उनकी खासी दिलचस्पी है… फिलहाल रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार हैं, लेकिन लोक कलाओं और संस्कृतियों के विकास के लिए खासे सक्रिय रहते हैं। विनोद जी ने तीजन बाई को उनके जन्मदिन पर बेहद संवेदनशील तरीके से याद किया है… उनके फेसबुक वॉल से 7 रंग के पाठकों के लिए साभार…)

Posted Date:

April 24, 2020

8:51 pm Tags: , , , , , ,

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