झूठ के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा – नित्यानंद तिवारी

हिंदी के प्रख्यात आलोचक नित्यानंद तिवारी ने देश के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए  कहा कि यह दौर  समाज मे नफ़रत फैलाने और  दो कौमों हिन्दू मुस्लिम को  आपस  में लड़ाने का है ।

श्री तिवारी ने  जनवादी लेखक संघ की ओर से दिल्ली के हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कवियों के साझा संकलन का विमोचन करते हुए यह बात कही। इस संकलन का संपादन दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कालेज में हिंदी के सहायक प्रोफेसर प्रेम तिवारी ने किया है।

22 फरवरी को हुए इस कार्यक्रम में नित्यानंद तिवारी ने  एक टैक्सी चालक की  मुस्लिम विरोधी बातों का ज़िक्र करते हुए अपना एक  अनुभव सुनाया और  कहा कि चिंता  की बात यह है कि यह ज़हर इस बुरी तरह फैल गया है कि हिन्दू मुस्लिम का यह संघर्ष अब  मोहल्ले मोहल्ले तक फैल गया है।

उन्होंने कहा कि आज बात बात में झूठ परोसा जा रहा है। इसलिए  समाज मे रोज फैलाये जा रहे झूठ के खिलाफ हमें अब  एकजुट होकर लड़ना पड़ेगा तभी सत्य की रक्षा हम लोग कर पाएंगे।

उन्होंने प्रेमचन्द को उद्धरित करते हुए कहा कि सांप्रदायिकता संस्कृति की दुहाई लेकर समाज मे फैलती है। आज संस्कृति का उसी रूप में इस्तेमाल किया जा रहा।

सुपरिचित आलोचक नलिन रंजन सिंह ने “आधुनिक हिंदी कविता: स्वप्न और संघर्ष “ पर अपने व्यायख्यान में बिहार के महेश नारायण की पहली मुक्त छंद कविता ”स्वप्न“ और रामनरेश त्रिपाठी की कविता का जिक्र करते हुए प्रसाद के ”कामायनी” में ”स्वप्न सर्ग” का उल्लेख किया और मानव जीवन में स्वप्न के महत्व को रेखांकित किया लेकिन इसके साथ नींद का भी जिक्र किया क्योंकि बिना नींद के सपने नहीं आते। उन्होंने इस संदर्भ में अनुराधा सिंह की किताब ”ईश्वर नहीं नींद चाहिए” का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने धर्मवीर भारती और नीरज जैसे कवियों की कविता में स्वप्न को रेखांकित करते हुए  सपनों को बचाने के लिए संघर्ष की बात कही और मुक्तिबोध को याद किया। उन्होंने कहा कि आज लेखकों को तय करना होगा कि वे किसके साथ हैं।

उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों में इस तरह के 6 आयोजन कर चुके हैं जिनमें उत्तर प्रदेश के कवियों ने भोपाल जाकर काव्य पाठ किया फिर वहां के कवियों का लखनऊ में भी आयोजन किया गया। इस तरह बिहार के कवियों का भी आयोजन हुआ और अब राजस्थान के कवियों का सम्मेलन होगा।

इस अवसर पर वयोवृद्ध आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी,  नित्यानंद तिवारी, इब्बार रब्बी, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, रेखा अवस्थी आदि मौजूद थे।

श्री त्रिपाठी ने समारोह में मौजूदा दौर और समाज के ताकतवर लोगों का पर्दाफाश करती दो धारदार  कविताएं सुनाईं। 95 वर्षीय श्री त्रिपाठी व्हील चेयर पर आए थे और इस उम्र में गहरे प्रतिरोध की कविताएं सुनाईं।

इसके बाद उत्तर प्रदेश के 14 कवियों ने काव्य पाठ किया जिनमें 5  कवयित्रियां थीं।। इनमें वसंत त्रिपाठी, विशाल श्रीवास्तव, महेश आलोक समेत अन्य कवि थे। इनमें उत्तर प्रदेश की चार कवयित्रियों सीमा सिंह, शालिनी सिंह, आभा खरे और शालू शुक्ला ने दिल्ली के साहित्यिक दरवाजे पर जोरदार दस्तक देते हुए अपनी कविताओं से  शानदार उपस्थिति दर्ज  कराई। ये संयोग है कि चारों लखनऊ शहर की हैं और जनवादी लेखक संघ से जुड़ी हैं।

अरविंद कुमार की रिपोर्ट

Posted Date:

February 23, 2025

9:47 pm Tags: , ,

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