साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित साहित्य मंच कार्यक्रम में 7 मई को चार रचनाकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। ये रचनाकार थे – संग्राम मिश्र (ओड़िआ), रत्नोत्तमा दास (असमिया), रीता मल्होत्रा (अंग्रेज़ी) एवं राजिंदर ब्याला (पंजाबी)। कार्यक्रम की अध्यक्षता संग्राम मिश्र ने की। सर्वप्रथम रत्नोत्तमा दास ने अपनी असमिया कहानी ‘रई जावा घड़ी’ के अंग्रेज़ी अनुवाद ‘द वाच ऑन हर रिस्ट’ का पाठ किया, जो एक डॉक्टर के मनोविज्ञान पर आधारित थी। एक छोटी बच्ची की दुर्घटना से वह किस तरह आहत होता है इसका सूक्ष्म वर्णन कहानी में किया गया था। रीता मल्होत्रा ने अपनी चार कविताएँ सुनाईं जिनके शीर्षक थे ‘जुगलबंदी’, ‘लीला इज सिक्सटिन’, ‘द सोल डिस्कवर्स इट्स इटरनिटी’ एवं ‘टुवर्ड्स इनफिनिटी’। उनकी कविताओं में वर्तमान समाज की विसंगतियों के साथ ही प्रकृति का सुंदर चित्रण भी था। राजेंद्र ब्याला ने अपनी तीन कविताएँ प्रस्तुत कीं जिनके शीर्षक थें ‘कतरा-कतरा’, ‘प्रेम की पहली कविता’ एवं ‘वाय डू आई राइट’।
अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संग्राम मिश्र ने सभी रचनाकारों की प्रस्तुति पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ कीं तथा अपनी दो कविताएँ प्रस्तुत कीं। एक कविता उन्होंने ओड़िआ भाषा में भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन अकादेमी के उपसचिव देवेंद्र कुमार देवेश ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं के महत्त्वपूर्ण कवि, लेखकों के साथ अच्छी संख्या में साहित्य प्रेमी भी उपस्थित थे।
अस्मिता कार्यक्रम में तीन रचनाकारों ने प्रस्तुत की अपनी रचनाएं
साहित्य अकादेमी की ओर से 5 मई को महिला रचनाकारों पर केंद्रित अस्मिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें तीन रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। सर्वप्रथम युवा लेखिका अनामिका अनु ने अपनी कहानी “येनपक कथा” प्रस्तुत की। कहानी नारी संसार की विभिन्न काल्पनिक और यथार्थ की छवियों को प्रस्तुत करते हुए एक कविता की तरह सरस और प्रभावी थी।
कहानी एक बूढ़े छातेवाले के सहारे स्त्रियों के ऐसे अदृश्य संसार को वर्णित करती हैं जहां सबकुछ बर्फ़ की तरह जल्द ही पिघलकर खत्म हो जाता है। रुचि मेहरोत्रा ने अपनी छह कविताएं प्रस्तुत की जो जिंदगी को अलग-अलग नज़रिए से देखने और समझने की कोशिश थी। उनकी कुछ कविताओं के शीर्षक थे- मन का विश्वास, अनकही बातें, जिंदगी एक सहेली है एवं किश्ती है जिंदगी भी । वरिष्ठ लेखिका अलका सिन्हा ने अपनी कहानी “पीपल , पुरखे और पुरानी हवेली” प्रस्तुत की। यह कहानी दो स्त्री दिलों को एक बाड़ी के बनने बिगड़ने के प्रतीक के रूप में सबके सामने प्रस्तुत करती है। कहानी केवल एक सास और बहू का आत्मीय किस्सा ही नहीं बल्कि समाज और पर्यावरण के संरक्षण के प्रति एक स्त्री का वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो वह अपनी अगली पीढ़ी को सौंपना प्रस्तुत चाहती है। कहानी के अंत में उपस्थित श्रोताओं ने अपनी संक्षिप्त टिप्पणियां भी प्रस्तुत की ।
साहित्य अकादेमी की प्रेस विज्ञप्ति
Posted Date:May 8, 2025
6:45 pm