अनामिका और अनुराधा शर्मा पुजारी ने साझा की अपनी रचना-प्रक्रिया

नई दिल्ली। “कविता का स्वभाव औरत के स्वभाव से मिलता-जुलता है। कविता इशारों में बात करती है, यही एक स्त्री के जीवन का शिल्प है । “
हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका ने विश्व पुस्तक मेले के उद्घटान दिवस पर साहित्य अकादमी के कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किये।

सहित्य अकादमी सम्मान से विभूषित कवयित्री अनामिका ने अपनी रचना-प्रक्रिया के बारे में संवाद करते हुए कहा कि अपने बारे में बात करना मुश्किल होता है, ख़ासकर एक क़स्बे की स्त्री के लिए। उन्होंने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान का ‘ब्लैक आउट’ मेरे लेखन का पहला दृश्यबंध है। ब्लैक आउट के दौरान जब अँधेरा होता था तो मेरे माता-पिता सोचते थे कि पेड़ पर एक लालटेन टाँगकर सारी जगह रोशनी फैला दें।
उन्होंने कहा कि साहित्य का काम भी यही है कि जब घनघोर अँधेरा हो जाए तो वहाँ प्रकाश फैलाना। अंत में, उन्होंने अपनी कविता ‘कमरधनिया’ का पाठ किया, जो गाँव में मिल जुलकर मूसल चला रही औरतों पर आधारित थी।

विश्व पुस्तक मेले में साहित्य अकादेमी द्वारा दो कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ और ‘कविता-पाठ’, हॉल सं.-2 स्थित ‘लेखक मंच’ पर आयोजित किए गए। ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में आज साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त दो लेखिकाओं अनामिका (हिंदी) एवं अनुराधा शर्मा पुजारी (असमिया) ने पाठकों के साथ अपनी रचना-प्रकिया साझा करने के साथ ही अपनी रचनाओं का पाठ भी किया। कविता-पाठ में शामिल कवि थे – मनोहर बाथम, हेमंत कुकरेती, रमेश प्रजापति एवं रश्मि भारद्वाज।

अनुराधा शर्मा पुजारी ने अपनी रचना-प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि मैं एक्सीडेंटली लेखिका बनी। मैं जब पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही थी तभी से लेखन आरंभ किया। मेरे लेखन में दुख, करुणा आदि ज़्यादा होता है क्योंकि मैं हाशिये के लोगों पर लेखन करती हूँ। मेरे जीवन में अकेलापन ज़्यादा रहा है इसलिए मैं प्रकृति से ज़्यादा जुड़ी रही हूँ, मैं अपने प्रत्यक्ष अनुभव से जुड़ी घटनाओं पर ही लिखती हूँ।

उन्होंने अपने आत्मकथात्मक संस्मरणों को पाठकों से साझा किया।

कविता-पाठ कार्यक्रम में सर्वप्रथम रश्मि भारद्वाज ने स्त्री विमर्श पर आधारित कविता ‘लाल’ का पाठ किया, साथ ही ‘विसर्जन’, ‘भूख’ और ‘वो भी दिल की तरह टबकता है’ कविताएँ प्रस्तुत कीं।

हेमंत कुकरेती ने मनुष्यों के बीच फैली वैमनस्यता पर आधारित कविता ‘दीवारें’ प्रस्तुत की, साथ ही ‘बोलते थे सब’ और ‘जन्म न मृत्यु’ शीर्षक कविताएँ भी प्रस्तुत कीं। रमेश प्रजापति ने ‘पानी का वैभव’, ‘युद्ध’, ‘मकई की हँसी’, ‘पानी’, ‘दुख’ और ‘रात की टहनी पर ठहरी उम्मीद’ कविताएँ प्रस्तुत कीं। मनोहर बाथम ने पहले दो अप्रकाशित कविताएँ और दो प्रकाशित कविताएँ प्रस्तुत कीं, जो मानव तस्करी पर आधारित थीं। पाठ के आरंभ में प्रख्यात कवि और चित्रकार लीलाधर मंडलोई ने सभी अतिथि कवियों का अंगवस्त्र से अभिनंदन किया।

साहित्य अकादेमी के संपादक(हिंदी) अनुपम तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी अतिथियों का श्रोताओं से परिचय कराया।

आमने-सामने कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता बोडो लेखिका रश्मि चौधरी और डोगरी लेखक मोहन सिंह ने भी हिस्सा लिया। नासिरा शर्मा की अध्यक्षता में हरिसुमन विष्ट और अवधेश श्रीवास्तव ने कहानी पाठ किया।

Posted Date:

January 11, 2026

10:00 pm Tags: ,

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