तबले के अनोखे जादूगर की याद…

पंडित लच्छू महाराज की बात ही कुछ और थी…

कुछ ही महीने पहले जब मशहूर कथक सम्राट बिरजू महाराज ने तबले पर अपना बेहतरीन हुनर दिखाया तो संगीतप्रेमियों को पंडित लच्छू महाराज की याद आ गई। पंडित लच्छू महाराज जब तबले के साथ होते थे तो वक्त मानो ठहर जाता था। नन्हीं सी उम्र में लगातार 16 घंटे तबला बजाकर सितारा देवी जैसी मशहूर कथक नृत्यांगना को हैरत में डाल देने वाले लच्छू महाराज ने तबले को जो ऊंचाई दी, वह उनके बाद के दौर के तबलावादकों के बस की बात नहीं। सितारा देवी के 20 मिनट के नृत्य के कार्यक्रम में पंडित जी ने तबले के इतने उतार चढ़ाव दिखाए कि सितारा देवी के पांव तबतक थिरकते रहे जबतक उनसे खून निकलने लगा। बाद में सितारा देवी ने लच्छू महाराज को गले लगाया और ये भविष्यवाणी कर दी कि आने वाले दिनों में यह बच्चा तबले का बेताज बादशाह बनेगा। बाद में सितारा देवी ने उन्हें अपना दामाद बना लिया।

सचमुच लच्छू महाराज ने वह कर दिखाया। 16 अक्तूबर को उनका जन्मदिन भले ही संगीतप्रेमी भूल गए हों लेकिन गूगल ने भारतीय कला, संगीत और संस्कृति में अपनी गहरी दिलचस्पी का नमूना पेश करते हुए पंडित जी को अपने बेहतरीन डूडल के ज़रिये याद किया और करोड़ों लोगों को एक बार फिर इस महान तबला वादक की याद दिला दी।

बदलते तकनीक के दौर में और इलेक्ट्रानिक संगीत के इस युग में अगर वाकई आप किसी स्वाभाविक और मौलिक कलाकार को याद करते हैं, तो बेशक वह उसका एक बड़ा सम्मान है। यह बात खुद पंडित लच्छू महाराज ने तब कही थी जब उन्हें पद्मश्री से सम्मानित करने के लिए चुना गया था लेकिन उन्होंने यह सम्मान लेने से मना कर दिया था। उनका मानना था कि ऐसे तमाम सम्मानों से बड़ा सम्मान उनके लिए लोगों का स्नेह और तालियां हैं।

स्वभाव से फक्कड़ लेकिन जिद्दी पर बेहद सरल पंडित लच्छू महाराज बनारस की भीड़ भरी दालमंडी के अपने घर की दूसरी मंजिल पर पूरी रात रियाज़ करते, सुबह वहां से आठ किलोमीटर तक गंगा घाट तक पैदल जाते, सबसे दुआ सलाम करते और फिर अपनी संगीत की दुनिया में खो जाते।

संगीत और कलाकार किसी सरहद में नहीं बंधते। पंडित लच्छू महाराज ने भी एक फ्रांसीसी महिला टीना से शादी की। उनकी एक बेटी है जो स्विटजरलैंड में रहती है। बॉलीवुड एक्टर गोविंदा उनके भांजे हैं और आपको जानकर ताज्जुब होगा कि गोविंदा भी अच्छा तबला बजाते हैं जो उन्होंने बचपन में लच्छू महाराज से ही सीखा है।

एक किस्सा और है पंडित लच्छू महाराज का। इमरजेंसी के दौर में जब देश के तमाम नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था तब उनके समर्थन में और इमरजेंसी के विरोध में पंडित लच्छू महाराज ने जेल में तबला बजाया था। जॉर्ज फर्नांडीज, देवव्रत मजूमदार और मार्कन्डेय जैसे समाजवादी नेताओं को जेल में पंडित जी ने तबला सुनाकर उनका हौसला बढ़ाया। अभिव्यक्ति की आजादी के लिए उन्होंने अपनी कला के जरये आवाज़ बुलंद की।

बनारस घराने के इस महान तबला वादक ने पिता वासुदेव महाराज से तबला सीखा और छोटी सी उम्र में ही स्टेज पर बजाने लगे। कुछ चुनिंदा फिल्मों में कूरियोग्राफी भी की। महल, मुग़ल-ए-आज़म और पाक़ीज़ा में उनके कंपोजिशन और निर्देशन पर मीनाकुमारी और मधुबाला ने नृत्य किया।

लखनऊ के कथक केन्द्र के संस्थापक रहे पंडित लच्छू महाराज ने बनारस और लखनऊ घराने का बेहतरीन तालमेल बनाया और अपने हुनर के साथ एक नई पीढ़ी को आगे बढ़ाया। ‘7 रंग’ की तरफ से पंडित लच्छू महाराज को सादर नमन।

Posted Date:

October 16, 2018 7:39 pm

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