सुनील यादव का ज्यामितीय अमूर्तन

श्रीधरणी कला दीर्घा में चल रही सुनील यादव की कलाकृतियों की प्रदर्शनी इस सुखद विस्मय से भर देती हैं कि कैसे एक अपेक्षाकृत अत्यंत युवा कलाकार ने अपना एक विशिष्ट मुहावरा विकसित कर लिया है।  कई बड़ी उम्र के कलाकार भी लंबे समय तक काम करने के बाद  अपना मुहावरा विकसित नहीं कर पाते। ज्यादातर वे कई दिशाओं में भटकते रहते हैं। पर सुनील ने शुरुआती दिनों में वो पा लिया है। पहली नजर में ही ये कलाकृतियां अपनी कलाभाषा के लिए भी आकर्षित करती हैं।

Posted Date:

August 6, 2019

4:28 pm
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