साहित्य और सियासत के सेतु की याद में…

अगर आज साहित्यकार और राजनेता डॉ शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव होते तो शायद संस्कृति और राजनीति के मौजूदा स्वरूप में कुछ न कुछ नया और सकारात्मक ज़रूर होता।  बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डा शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव एक शिक्षाविद होने के नाते हमेशा नई पीढ़ी को अपने संस्कारों, संस्कृति और विरासत के प्रति जागरूक करते रहे और सक्रिय राजनीति में रहकर भी उन्होंने शुद्ध रूप से साहित्य और संस्कृति की ही सेवा की। डॉ शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव के ये सारे पहलू उनकी जयंती पर 24 मार्च को पटना के बिहार साहित्य सम्मेलन में आयोजित संगोष्ठी में सामने आए।

Posted Date:

March 26, 2019

4:32 pm
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