सामाजिक बदलाव की उम्मीदों से भरे थे शमशेर

12 मई 1993 को जब शमशेर बहादुर सिंह के निधन की खबर अहमदाबाद से आई थी, तब अचानक उनके साथ गुज़रे वो सारे पल हमारे दिलो दिमाग में एक सुखद अतीत की तरह उमड़ने घुमड़ने लगे थे। उस वक्त मैं त्रिलोचन जी के साथ बैठा था । शमशेर  के बारे में बातें करते हुए त्रिलोचन  की आंखों में कई तरह के भाव आते जाते रहे। शमशेर का गुज़रना उन्हें विचलित तो कर रहा था, लेकिन वो संयत थे। कई बार कुछ गंभीर होते, लेकिन कई दफा उन पुराने दिनों में भटकते हुए हल्के से मुस्कराने भी लगते ।

Posted Date:

May 12, 2020

6:44 pm
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