‘सरयू से गंगा’ ने दिलाई ‘वोल्गा से गंगा तक’ की याद

अपने ज़माने के मशहूर सांस्कृतिक हस्ताक्षर रहे जाने माने यायावर लेखक राहुल सांकृत्यायन के उपन्यास ‘वोल्गा से गंगा तक’ जिसने भी पढ़ा होगा, उसके लिए भारतीय इतिहास में ब्राह्मणवाद के तमाम ढकोसलों को समझना आसान है। राहुल जी ने यह उपन्यास 1943 में लिखा था। साहित्य अकादमी सभागार में 28 अप्रैल को मशहूर स्तंभकार और लेखक कमलाकांत त्रिपाठी की किताब ‘सरयू से गंगा’ पर चर्चा के दौरान राहुल सांकृत्यायन तो किसी को याद नहीं आए लेकिन किताब के शीर्षक ने ‘वोल्गा से गंगा तक’ की याद ज़रूर ताज़ा कर दी।

Posted Date:

May 1, 2019

4:39 pm
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