संघर्ष और विद्रोह के कवि थे बाबा नागार्जुन

इमरजेंसी के दौर में कैसे नागार्जुन एक जनकवि के रूप में स्थापित हुए, आंदोलनों में उनकी क्या भूमिका रही और कैसे उनके ख़ास अंदाज़ ने उन्हें एक अलग पहचान दी, इसके बारे में सबकी अपनी अपनी राय हो सकती है। लेकिन नागार्जुन का अंदाज़ जिन लोगों ने देखा है, उन्हें क़रीब से समझा है, वो जानते हैं कि नागार्जुन अपने धुन और विचारों के पक्के थे, किस बात पर बिफर पड़ें और किसी सरकार, नेता या अफ़सर की परवाह किए बिना कैसे वो अपनी रचनाओं में, मंच पर या किसी भी जगह से अपनी बात कह जाएं, कोई नहीं जानता था।

Posted Date:

June 24, 2021

6:42 pm
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