शहनाई के शहंशाह से मिलना और महसूस करना

बेशक बनारस उनके बगैर सूना हो गया हो, उनकी शहनाई अब विश्वनाथ मंदिर में न सुनाई देती हो… लेकिन सुरों का ये शहंशाह आज भी बनारस का पर्याय है… जब भी बनारस का नाम लिया जाता है तो उस्ताद बिस्मिल्ला खां का नाम खुद ब खुद उससे जुड़ जाता है। उनके बारे में बहुत कुछ लिखा गया, बहुत सी बातें छपीं, लेकिन हम आपको ले चलते हैं करीब 25 साल पहले जब उनकी उम्र तकरीबन 82 साल की थी… बनारस के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राजीव सिंह जब उनसे मिलने गए और जिस तरह उन्हें महसूस किया …पेश है वही अनुभव ‘7 रंग’ के पाठकों के लिए…  

Posted Date:

June 11, 2020

12:30 pm
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