वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी…

वह 1977 का साल था। पहली दफा तभी जगजीत सिंह को सुनने का मौका मिला। लाइव नहीं, बल्कि उनके पहले अल्बम – ‘द अनफॉरगेटबल्स’ के दो एलपी रिकॉर्ड्स में। फिलिप्स के नए नए स्टीरियो की धमक के बीच जगजीत सिंह जब अपने अंदाज़ में ‘आहिस्ता आहिस्ता’ गाते तो हम सब उनके साथ साथ खुद भी ‘आहिस्ता आहिस्ता’ बरबस ही गाने को मजबूर हो जाते। वो अंदाज़ ही अलग था और उस दौर के नए नवेले ग़ज़ल गायक के इस अकेले अल्बम ने संगीत की दुनिया में और खासकर ग़ज़लों की दुनिया में हलचल मचा दी थी। वैसे तो इस अल्बम में उनकी एकल (सोलो) गज़ल सिर्फ चार थी लेकिन अपनी हमसफ़र चित्रा सिंह के साथ मिलकर उन्होंने दो गज़लें और गाईं, चित्रा जी की भी 4 सोलो ग़ज़लें इसमें शामिल थी।

Posted Date:

February 8, 2019

4:01 pm
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