नारी मन की पीड़ा को मिली आवाज़

गाजियाबाद में हुए ‘महफ़िल-ए-बारादरी’ कार्यक्रम के दौरान शायरों ने तमाम रंग बिखेरे। अध्यक्ष डॉ. सीता सागर ने कहा कि “महफ़िल ए बारादरी” ने अदब की दुनिया में जल्द ही ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया है। अपने मुक्तक एवं गीतों पर उन्होंने जमकर सराहना बटोरी। उन्होंने कहा “आईने पर नज़र नहीं रहती, फिक्र इधर कोई नहीं रहती, मेरी दीवानगी का आलम है, खुद को खुद की खबर नहीं रहती।” अगले मुक्तक में उन्होंने कहा “दोस्तों, दुश्मनों से रही बेखबर, न जाने कब ये सफ़र बन गया हमसफ़र, तिनके-तिनके से मैं नीड़ रचती रही, घर से निकली मगर मन से निकला नहीं घर।”

Posted Date:

March 15, 2021

6:03 pm
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