पाश : हमारे वक्त का ‘सबसे खतरनाक कवि’

हम लड़ेंगे…कि लड़ने के बग़ैर कुछ भी नहीं मिलता…हम लड़ेंगे…कि अब तक लड़े क्यों नहीं…हम लड़ेंगे…अपनी सज़ा कबूलने के लिए…लड़ते हुए मर जानेवालों की याद ज़िन्दा रखने के लिए…हम लड़ेंगे साथी… ये चंद पंक्तियां मिसाल है अवतार सिंह पाश के भीतर धधकती आग की। महज़ 38 साल की छोटी सी जिंदगी में पाश ने इतना कुछ लिख डाला और उनकी हर लाइन में एक बेहतर समाज का सपना, बदलाव की छटपटाहट और क्रांति का एक ऐसा जज्बा नजर आया कि पंजाब के इस नौजवान कवि की तुलना चिली के मशहूर क्रांतिकारी कवि पाब्लो नेरुदा से की जाने लगी… सुधीर राघव  का आलेख

Posted Date:

September 9, 2020

5:00 pm
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