‘नैयर साहब का जाना मन में टीस पैदा करता है’

वो साठ का दशक था। कुलदीप नैयर तब एक उर्दू अखबार ‘अंजाम’ में काम करते थे। मेरी उर्दू और हिन्दी अच्छी थी और नैयर साहब उर्दू के साथ अंग्रेज़ी में काफी उम्दा लिखते थे। नैयर साहब हिन्दी में नहीं लिखते थे। लेकिन उनके अंग्रेज़ी में लिखे लेखों का हिन्दी अनुवाद छपता था। मुझसे 7-8 साल बड़े थे। हमें उनके साथ ‘अंजाम’ में साथ काम करने का मौका मिला। उनसे बहुत कुछ सीखा। बेहतरीन इंसान थे। बेहद सरल। उनके पिता सियालकोट में डॉक्टर हुआ करते थे लेकिन बंटवारे के बाद नैयर साहब यहां आ गए। लिखने पढ़ने वाले और पाकिस्तान को समझने वाले बेहतरीन पत्रकार थे। (वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप तलवार की नज़र में कुलदीप नैयर)

Posted Date:

August 23, 2018

5:43 pm
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