एक विद्रोही व्यंग्य कवि का यूं चले जाना…

डॉ रवीन्द्र राजहंस बेशक प्रोफेसर रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव हों, अंग्रेज़ी साहित्य के उम्दा प्रोफेसर हों, अमेरिकी आलोचना में शिकागो स्कूल ऑफ क्रिटिसिज्म जैसे जटिल विषय पर पीएचडी किया हो, लेकिन हिन्दी व्यंग्य लेखन और कविता में जो उनकी पहचान रही, समाज और सत्ता की विद्रूपता को देखने की जो उनकी दृष्टि रही, वह उन्हें सबसे अलग करती है। सामाजिक बदलाव के आंदोलन के साथ साथ जेपी आंदोलन को करीब से देखते, महसूस करते और अपनी साहित्यिक गतिविधियों के जरिये लगातार सक्रिय रहते रवीन्द्र राजहंस ने खूब लिखा, कुछ अलग लिखा और नुक्कड़ कविता आंदोलन के अहम किरदारों में रहे। करीब 82 साल की उम्र में उन्होंने चुपचाप सबको अलविदा कह दिया। 

Posted Date:

May 8, 2021

6:15 pm
Copyright 2020 @ Vaidehi Media- All rights reserved. Managed by iPistis