जो भाई को बेगाना बनाए, ऐसे धर्म को धिक्कार!

आखिर राहुल सांकृत्यायन में ऐसा क्या है जो उन्हें बार बार पढ़ने और याद करने की ज़रूरत महसूस होती है? आखिर मौजूदा दौर में राहुल सांकृत्यायन क्यों ज़रूरी हैं? क्यों उनकी किताब ‘वोल्गा से गंगा’ का ज़िक्र हमेशा आता है और क्यों एक ब्राह्मण होने के बाद भी उन्होंने ब्राह्मणवाद और ढकोसलों का खुलकर विरोध किया? उनके तार्किक विश्लेषणों और समाज को देखने के उनके नज़रिये ने कैसे एक नए समाज की परिकल्पना की और कैसे राहुल सांकृत्यायन ने ‘बाइसवीं सदी’ नाम की किताब में तब के भारत की परिकल्पना को यहां की सोच और परिस्थितियों के आधार पर पेश कर दिया। उनकी किताब ‘तुम्हारी क्षय ‘का यह आलेख आज भी कितना प्रासंगिक है, ये हमें पढ़ना चाहिए…

Posted Date:

April 9, 2021

6:40 pm
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