जहां ग़म भी न हो, आंसू भी न हो…

एक ऐसी दुनिया की कल्पना, एक ऐसे खुशनुमा समाज का सपना और हर तरफ प्यार ही प्यार की तमन्ना लिए 58 साल की उम्र में किशोर दा ने बेशक सबको अलविदा कह दिया हो, लेकिन वो हमेशा सबके बीच हैं… उसी तरन्नुम में, उसी अंदाज़ में और अपने उन्हीं खूसूरत सपनों के साथ….  उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने उन्हें इस लायक बनाया, उनकी प्रतिभा को मंच दिया, तमाम मौके दिए और किशोर को किशोर बनाया… संयोग देखिए दादा मुनि  के जन्मदिन पर ही किशोर कुमार ने अंतिम सांस ली। बेशक अशोक कुमार के किस्से उतने न मिलें लेकिन उनके मस्तमौला भाई किशोर की गायिकी से ज्यादा उनकी ज़िंदगी के तमाम रंग आपको जगह जगह ज़रूर दिखाई देते हैं।

Posted Date:

October 13, 2017

3:43 pm
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