जब समझना नहीं, फिर पढ़ना क्‍यों ?

मुंशी प्रेमचंद को 31 जुलाई को उनके जन्मदिन पर तमाम साहित्यप्रेमी और कथाजगत के लोग याद करते हैं। इस बार भी कर रहे हैं। अब इस डिजिटल ज़माने में प्रेमचंद पर वेबिनार हो रहे हैं, फेसबुक पर तमाम लोग और संस्थाएं इस मौके पर लाइव दिख रहे हैं। ऐसे में हम आपके लिए वरिष्ठ पत्रकार रवि प्रकाश का एक लेख ले कर आ रहे हैं जिसमें उन्होंने प्रेमचंद की दो कहानियों की चर्चा की है – ‘नमक का दारोगा’ और ‘बड़े घर की बेटी’। आज के संदर्भ में प्रेमचंद को समझने के लिए इन कहानियों पर की गई चर्चा और रवि प्रकाश की ओर से उठाए गए सवाल अहम् हैं।

Posted Date:

July 31, 2020

3:52 pm
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