चला गया शब्दों का चित्रकार…

इस कोरोना काल ने हमारे बहुत सारे साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों और संजीदा लोगों को हमसे छीना है।  कवि गीतकार पद्मश्री डॉ कुअंर  बेचैन साहब का जाना देश के जाने माने लेखक, कहानीकार, उपन्यासकार से रा यात्री को बेहद विचलित कर गया है… दोनों कालेज के दिनों के साथी रहे… यात्री जी खुद बीमार रहते हैं लेकिन लगातार ऐसी खबरों से वे बेहद आहत हैं.. हाल ही में उनकी बेटी भी इस दौर में उनका साथ छोड़ गईं.. यात्री जी बेबस और बेहद टूटे हुए अपने शब्दों को टुकड़े टुकड़े में कहते हैं। उनके बेटे आलोक यात्री उन्हें कलमबद्ध करते हैं और कुअंर बेचैन के प्रति यात्री जी अपने मन की पीड़ा कुछ इस तरह जाहिर करते हैं….

Posted Date:

April 29, 2021

9:06 pm
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